आम उत्पादक अनजान या कम है रुझान

Kangra Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
नूरपुर (कांगड़ा)। आम की पैदावार में प्रदेश भर में अव्वल जिला कांगड़ा के आम उत्पादकों के लिए प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई फसल बीमा योजना हांफने लगी है। मौसम की बेरुखी के चलते हर साल करोड़ों का नुकसान झेलने वाले बागवानों में योजना का लाभ उठाने को रुझान काफी कम देखा जा रहा है। करीब तीन साल पहले कांगड़ा जिले के नूरपुर, नगरोटा सूरियां, फतेहपुर व इंदौरा चार ब्लाकों में शुरू की गई इस योजना में अब तक सिर्फ 492 बागवानों ने ही बीमा कवर लेने में दिलचस्पी दिखाई है।
हालांकि, रबी सीजन 2010-11 में योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें सिरमौर (पांवटा साहिब), ऊना (अंब), हमीरपुर (हमीरपुर, नादौन) व बिलासपुर (बिलासपुर सदन) जिलों के पांच नए ब्लाकों को शामिल किया गया। बावजूद इसके आम उत्पादक योजना का लाभ उठाने को सामने नहीं आए। 2009-10 रबी सीजन में सिर्फ 209 बागवानों ने बीमा कवर लिया तो वर्ष 2010-11 में यह आंकड़ा 283 पर ही सिमट गया। इसके विपरीत शिमला व कुल्लू जिलों के सेब उत्पादकों के लिए शुरू की गई फसल बीमा योजना की प्रायोगिक सफलता के बाद इसमें मंडी व चंबा जिला के नौ ब्लाकों में बागवानों ने भी खासी दिलचस्पी दिखाई है। वर्ष 2009-10 में सेब सीजन के दौरान 3092 बागवानों ने फसल का बीमा करवाया। इसमें से 2119 बागवानों को एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया की तरफ से 3.66 करोड़ रुपए की भरपाई की गई। 2010-11 सेब सीजन में योजना का दायरा बढ़ने के चलते कुल 14037 बागवानों ने बीमा कवर लिया। इनमें से 12598 बागवानों को 8.07 करोड़ रुपए का इंश्योरेंस क्लेम दिया गया।
उधर, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के प्रशासनिक अधिकारी पवन राणा ने भी माना कि योजना में चार जिलों के पांच ब्लाकों को शामिल करने के बावजूद आम उत्पादक योजना का लाभ उठाने में काफी कम रुचि दिखा रहे हैं। सेब उत्पादकों में फसल बीमा योजना के प्रति अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।

आंकड़ों की नजर से
सेब आम
वर्ष 2009-10 2010-11 2009-10 2010-11
बीमित बागवान 3092 14037 209 283
दावे (क्लेम) 2119 12598 158 87
क्षतिपूर्ति 3.66 8.07 17.24 6.24
(करोड़) (करोड़) (लाख) (लाख)

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