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अध्यापक नहीं, क्या पढ़ेंगे बच्चे

Kangra Updated Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
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नूरपुर (कांगड़ा)। छात्रों को घर-द्वार गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के सरकारी दावे हवाई साबित हो रहे हैं। विकास खंड नूरपुर के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल मिंजग्रां में आधा दर्जन से ज्यादा अध्यापकों के पद लंबे समय से खाली चल रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हालांकि, मिंजग्रां स्कूल को वर्ष 2007 में सीनियर सेकेंडरी स्कूल का दर्जा तो मिल गया, लेकिन अध्यापकों की व्यवस्था आज दिन तक नहीं हो पाई है। लिहाजा स्कूल में स्टाफ की कमी और विषयों के अभाव के चलते पंचायत व इसके आसपास गांवों के छात्रों को साइंस व कामर्स विषय पढ़ने के लिए 16 से 28 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
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फिलहाल मिंजग्रां स्कूल में सिर्फ आर्ट्स विषय ही पढ़ाया जा रहा है। बावजूद इसके स्कूल में इतिहास, संस्कृत व शारीरिक शिक्षा विषय के अलावा भाषा व कला अध्यापक के पद भी लंबे अरसे से रिक्त पड़े हैं। साइंस विषय के लिए स्वीकृत फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी के तीन पद को भरना तो मानो जैसे शिक्षा विभाग भूल ही गया है। ऊपर से 15 किलोमीटर के दायरे में कोई दूसरा सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी नहीं है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सागर चंद वर्मा, पीटीए प्रधान बिशंभर सिंह, पंचायत प्रधान कुलदीप पाठक, उपप्रधान बलविंद्र सिंह, पंचायत सदस्य कमला देवी, गिद्दो देवी, केसर चंद, हुकम चंद व अशोक कुमार इत्यादि का कहना है कि स्कूल में साइंस व कामर्स विषय की क्लासें शुरू नहीं होने के कारण गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए काफी दूर जाना पड़ रहा है। उन्होंने शिक्षा विभाग से स्कूल में स्टाफ की तैनाती कर साइंस व कामर्स विषय की क्लासें शुरू करने की मांग की है। प्रधानाचार्य एचएल आचार्य ने बताया कि स्कूल में स्टाफ की कमी के बारे में शिक्षा विभाग को समय-समय पर अवगत करवाया जाता है।

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