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बेरोजगार नहीं, शिक्षण संस्थानों में बेकार युवा हो रहे तैयार

Shimla	 Bureauशिमला ब्यूरो Updated Sun, 21 Apr 2019 10:59 PM IST
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बेरोजगार नहीं, शिक्षण संस्थानों में तैयार हो रहे बेकार युवा
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अमर उजाला दफ्तर में युवा संवाद कार्यक्रम
युवाओं ने माना : सबको नौकरी देना संभव नहीं, रोजगार के साधन हों विकसित
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं के परिणाम बता रहे हैं कि शिक्षण संस्थानों में बेरोजगार नहीं, बेकार युवा तैयार हो रहे हैं। प्रदेश में एलाइड के पद ही नहीं भर पा रहे हैं, कुकुरमुत्तों की तरह पहले कंप्यूटर शिक्षण संस्थान तो खोल दिए, लेकिन बाद में अब इन शिक्षण संस्थानों के प्रमाण पत्रों को कर्मचारी चयन आयोग मान्यता ही नहीं दे रहा है। अमर अमर उजाला के धर्मशाला दफ्तर में युवा संवाद कार्यक्रम में युवाओं ने बेरोजगारी, रूसा, शिक्षा की गिरती गुणवत्ता, छात्र संघ चुनाव, चुनाव में नेताओं की अभद्र टिप्पणियों और जमीनी मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी।
युवाओं ने माना कि सबको सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, लेकिन रोजगार के साधन विकसित करना तो सरकार के हाथ में है। सरकार ने युवाओं के लिए स्वरोजगार की योजनाएं तो बना दी लेकिन हकीकत में बैंक बिना गारंटी लोन नहीं देता। राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण दस सालों से केंद्रीय विवि का निर्माण नहीं हो पाया तो हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में आधारभूत सुविधाओं से विद्यार्थी वंचित हैं। कांगड़ा-चंबा में असंगठित पर्यटन के बजाय इसे संगठित तरीके से संचालित कर रोजगार के साधन विकसित करने, शिक्षण संस्थानों में खाली पदों को भरकर रोजगार प्रदान करने का सुझाव युवाओं ने दिया। युवा संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला, क्षेत्रीय केंद्र खनियारा के विद्यार्थियों ने अपनी राय रखी।
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असल मुद्दों से भटके, जाति और समुदाय का नेता बनने को आतुर
युवाओं के अनुसार चुनाव में जाति और समुदाय का नेता तो सभी बनने को तैयार हो रहे, लेकिन युवाओं के असल मुद्दों पर कोई बात नहीं करना चाह रहा है। हालांकि पहले भी नेताओं के बोल बिगड़ते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया और अन्य साधनों के कारण एकाएक लोगों को नेताओं की गलत बयानबाजी की सूचना मिल रही है। इससे लोगों को नेताओं के असली चेहरे को समझने में सहायता मिल रही है।
10वीं, 12वीं पास नेता क्या बनाएंगे देश का भविष्य
कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट से प्रत्याशियों की योग्यता सिर्फ दसवीं और 12वीं होने के सवाल पर युवाओं ने बताया कि यह इस देश के लोकतंत्र का दुर्भाग्य है। जो नेता कभी कॉलेज ही न गया तो वह शैक्षणिक संस्थान के हित के बारे में क्या करेगा। वह युवाओं की तकलीफों के बारे में कैसे जान पाएगा। बेरोजगारी का हल कैसे निकाल पाएगा। युवाओं ने कहा कि जैसे नौकरी और पढ़ाई के लिए योग्यता सरकार तय करती है वैसे ही सांसद और विधायक बनने के लिए भी योग्यता तय होनी चाहिए।
धर्मशाला शिक्षा हब या स्पोर्ट्स अपने आप में प्रश्न
चुनावों के समय नेता अपनी सुविधा अनुसार धर्मशाला को कभी शिक्षा हब बोलते हैं, तो कभी स्पोर्ट्स हब। ये दोनों के बयान एक दूसरे को कटाक्ष करते हैं। क्योंकि, शिक्षा हब की दृष्टि से यहां कोई ऐसी सुविधा नहीं, तो स्पोर्ट्स की दृष्टि से भी पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं। युवाओं ने कहा कि नेता पहले यह तय करें कि धर्मशाला को शिक्षा हब बनाना है या स्पोर्ट्स।

सरकार दें सुविधाएं तो नहीं करने पड़ें प्रदर्शन
हिमाचल विवि में छात्र संघ चुनावों को बहाली की भी युवाओं ने मांग उठाई। युवाओं ने एकमत से कहा कि छात्र राजनीति से विद्यार्थियों की राजनीतिक समझ का विकास होता है। धरने-प्रदर्शन को आधार मानकर चुनाव बंद करना गलत है। यदि सरकारें छात्र हित की मांगे आसानी से मान ले तो छात्र संघों को प्रदर्शन नहीं करने पड़ेंगे।

एमबीए की 70 हजार फीस, कंप्यूटर सुविधा नहीं : कोमल
एचपीयू क्षेत्रीय केंद्र मोहली (धर्मशाला) के विधि विभाग की छात्रा कोमल सूर्यवंशी ने कहा कि केंद्र में एमबीए विभाग 70 हजार रुपये फीस ले रहा है, लेकिन उन्हें कंप्यूटर तक की सुविधा नहीं दी जा रही है। विधि विभाग के विभागाध्यक्ष को छोड़कर अन्य सभी प्राध्यापक अस्थायी रखे गए हैं। छात्रावास की सुविधा न मिलने से भी विद्यार्थी परेशान हैं।

सफर में बीत रहा एक छात्र का एक घंटा 20 मिनट : नवनीत
एबीवीपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नवनीत कौशल ने कहा कि केंद्रीय विवि के वर्तमान में धर्मशाला, शाहपुर और देहरा में कैंपस चल रहे हैं। कांगड़ा में सीयू के छात्रावास बनाए गए हैं। कांगड़ा से इन कैंपस तक पहुंचने के लिए एक छात्र को करीब 40 मिनट आने और 40 मिनट का सफर प्रतिदिन बस में करना पड़ता है। ऐसे में प्रतिदिन एक छात्र का एक घंटा 20 मिनट सफर में ही खराब हो रहा है।
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पंचायत स्तर पर खुले कौशल विकास केंद्र : अतुल
शोधार्थी अतुल ठाकुर ने कहा कि सभी को नौकरी देना संभव नहीं है। ऐसे में बच्चे के हुनर को देखकर उसे तराशा जाए। इससे वह स्वरोजगार के लिए तैयार हो। इसके लिए सरकार को पंचायत स्तर पर आईटीआई की तर्ज पर कौशल विकास केंद्र खोलने चाहिए। बिजली प्रोजेक्ट की ओर सरकार का ज्यादा ध्यान है, जबकि पर्यटन से रोजगार के ज्यादा साधन विकसित किए जा सकते हैं। प्रदेश के जिला पुस्तकालयों में अन्य विभागों के कब्जे हैं।

रूसा ने खराब किया युवाओं का भविष्य: सूरज
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला के बीएससी के छात्र सूरज ने कहा कि वार्षिक परीक्षा प्रणाली में दो विषय में छात्र फेल होने पर उसे दोबारा उसी क्लास में बैठना पड़ता था। रूसा के सेमेस्टर सिस्टम में छात्र सभी विषयों में फेल होने के बावजूद भी आगे बढ़ जाता था, जो गलत है। इससे कई छात्रों का भविष्य खराब हुआ है।

निजी शिक्षण संस्थानों में पैसे देकर मिल रही डिग्री : संजीव
केंद्रीय विवि के एमबीए पर्यटन विभाग के छात्र संजीव ने कहा कि कई निजी शिक्षण संस्थानों में पैसे देकर युवा डिग्री खरीद रहे हैं, लेकिन उन्हें विषय बेसिक जानकारी भी नहीं होती। इससे डिग्री धारक बेरोजगार युवाओं की फौज खड़ी हो रही है, जिसे हम सही मायनों में बेरोजगारी भी नहीं कह सकते हैं।

युवाओं से संबंधित मुद्दे
1. मनमानी फीस वसूलने पर निजी स्कूलों की संबद्धता रद्द करने को बने कानून
2. छात्र संघ चुनावों को किया जाए बहाल
3. शिक्षण संस्थानों में मिले आधारभूत सुविधाएं
4. शिक्षण संस्थानों में भरे जाएं रिक्त पद
5. शिक्षण संस्थानों के बनें छात्रावास
6. जिला पुस्तकालयों से हटाए जाए अन्य विभागों के कब्जे
7. केंद्रीय विवि का जल्द तैयार किए जाए भवन
8. क्षेत्रीय केंद्र में भरे जाएं रिक्त पद, आधारभूत सुविधाएं भी दे सरकार
9. युवाओं को स्वरोजगार के लिए खुले बैंकिंग सेक्टर के द्वार
10. पर्यटन में स्वरोजगार के संसाधनों का किया जाए विकास
11. पंचायत स्तर पर खुले कौशल विकास केंद्र
12. निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर लगे अंकुश
13. उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता भी हो निर्धारित
14. जाति और समुदाय की बजाय मुद्दों पर करें उम्मीदवार चर्चा
15. विभागों और शिक्षण संस्थानों में बंद हों बैक डोर भर्तियां

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