पेंशन नियमों की हो रही अनदेखी

Chamba Updated Tue, 26 Nov 2013 05:44 AM IST
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चंबा। महालेखाकार कार्यालय की स्थानीय बचत भवन में हुई कार्यशाला में विभागों के डीडीओ की ओर से पेंशन संबंधी नियमों की अवहेलना की बात सामने आई है। इसके अलावा कर्मचारियों की भविष्य निधि की निकासी को लेकर भी खामियां बताईं। एजी आफिस शिमला से पहुंचे अधिकारियों ने सोमवार को सभी विभागों के आहरण एवं वितरण अधिकारियों को ट्रेनिंग देते हुए इन खामियों को दूर करने को कहा है। इस दौरान उन्होंने खासकर पेंशन के मामलों में होने वाली देरी के लिए एजी आफिस ने संबंधित विभागों के एचओडी को जिम्मेवार ठहराते हुए नियमों का पालन न करने की बात बताई। 2001 के बाद क्लासफोर कर्मचारी 58 वर्ष की आयु में ही रिटायर किए जाएंगे। कुछ विभाग इन्हें 60 वर्ष की आयु में रिटायर कर रहे हैं, जो गलत है। प्रीमेच्योर रिटायरमेंट के रूल प्रदेश सरकार ने अलग से बनाए हैं। प्रदेश में इनका पालन किया जाएगा। प्रदेश में 15 मई, 2003 से पहले के कर्मियों पर ही पेंशन व सीसीएस की स्कीम लागू होगी।
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पेंशन संबंधी दस्तावेजों के विषय पर एजी ऑफिस से आए नागेंद्र कुमार ने बताया कि संबंधित विभागों की ओर से निर्धारित समय पर दस्तावेज पूर्ण करके प्रेषित न करने से ही पेंशन के मामलों में देरी होती है। इसके लिए एजी आफिस जिम्मेवार नहीं है। सीसीएस पेंशन नियम के रूल 56 के तहत एचओडी को साल में दो बार अपने अधीन आने वाले उन कर्मियों की सूची एजी कार्यालय को भेजनी होगी, जो सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यह सूची 31 जनवरी और 31 जुलाई को भेजना जरूरी है। प्रदेश के सिर्फ 25 फीसदी मामलों में ही यह रूल लागू हो रहा है। इसी तरह रूल 61/4 के तहत यह सूची छह माह पूर्व भेजने का प्रावधान है। इस सूची के साथ भेजे जाने वाले दस्तावेजों की भी जानकारी दी गई। यह भी बताया गया कि वर्ष 2006 में पेंशन रूल्स में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया है कि पेंशन व भविष्य निधि का केस रिटायरमेंट के तीन माह पहले ही बन जाना चाहिए। इसी तरह कर्मचारी भविष्य निधि के मामले में डीडीओज द्वारा बरती जा रही अनियमितताओं के बारे में बताया गया और इस संबंध में आशंकाओं का निपटारा किया गया।
एसएमएस से मिलेगी जीपीएफ की जानकारी
चंबा। एजी आफिस जल्द ही कर्मचारी भविष्य निधि की जानकारी समय-समय पर मुहैया करवाने के लिए एसएमएस प्रणाली लागू करने जा रहा है। बचत भवन में हुई बैठक के दौरान सभी विभागाध्यक्षों को अपने तहत आने वाले कर्मियों के मोबाइल नंबर मुहैया करवाने को कहा गया। इसके अलावा जीपीएफ स्टेटमेंट के लिए कर्मचारियों के शिमला चक्कर काटने को गैरवाजिव बताते हुए डीडीओज को इस संबंध में जानकारी मुहैया करवाने के निर्दश दिए गए हैं। साथ ही कहा गया कि डीडीओ ही दो या इससे अधिक बार एक ही मद के लिए जीपीएफ से निकासी की इजाजत देने को जिम्मेवार है।
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