विस्थापन का दंश झेलते बंद हो गईं सांसें

Chamba Updated Mon, 25 Nov 2013 05:43 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
चंबा। चमेरा जल विद्युत परियोजना चरण तीन के विस्थापितों का दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस परियोजना की सुरंग से रिसाव के चलते मौखरी, सुगाड़ी व चूड़ी पुल के ग्रामीण विस्थापन का दंश झेल रहे हैं। इसके चलते उन्हें विवाह-शादियों से लेकर मरने-जीने तक के लिए अपना घर नसीब नहीं हो पा रहा है। इस बीच एक विस्थापित रामदियाल शर्मा पुत्र वकील की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया। विस्थापितों की लड़ाई लड़ रहे पुलन वार्ड के जिला परिषद सदस्य ललित ठाकुर ने बताया कि रामदियाल को अपने घर से विस्थापन होकर धरवाला में किराये के मकान में रहने पर मजबूर होना पड़ा। इस दौरान बीमारी के कारण उसे अपने भांजे के घर शरण लेनी पड़ी। रविवार सुबह साढ़े सात बजे रामदियाल की अपने भांजे के घर ही मौत हो गई। ललित ठाकुर ने बताया कि भौंखरी निवासी रामदियाल का अपना घर होता तो सालों से उसका हाल चाल पूछने वाले बाकी ग्रामीण भी उसके सुखदुख में हाथ बांट सकते थे, मगर विस्थापन के कारण सभी इधर-उधर रहने को मजबूर हो गए हैं। रामदियाल की मौत से सभी को गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने बताया कि विस्थापितों को इस बात का ज्यादा दुख है कि उन्हें सुरंग रिसाव के चलते अपने पैतृक घरों और सुखदुख बांटने वाले साथी ग्रामीणों से बिछड़ना पड़ा है। ललित ठाकुर ने घटिया काम के चलते हुए रिसाव की सीबीआई जांच करवाने की मांग करते हुए कहा कि आखिर ग्रामीण इसका दंश कब तक झेलते रहेंगे। साथ ही उन्होंने विस्थापितों को जल्द से जल्द भूमि और मकान मुहैया करवाकर एक जगह रहने की व्यवस्था करने की मांग की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us