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दाल-राजमाह को पछाड़ने लगा सेब

Chamba Updated Tue, 12 Feb 2013 05:31 AM IST
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भरमौर (चंबा)। उपमंडल में बागवानों की दालें, मक्की, आलू और राजमाह की फसलों को उगाने में रुचि कम हो गई है। बागवान अब सेब के तगड़े कारोबार को देखते हुए सेब उत्पादन में ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इस बार भी उद्यान विभाग ने बागवानों को 40 हजार सेब के पौधे बेचे हैं। बागवान खाली जमीन पर सेब के पौधे लगा रहे हैं। सेब के पौधे में तीन से चार सालों में फल आने शुरू हो जाते हैं। इनको बेचकर मार्केट में किसान अच्छा खासा पैसा भी कमा रहे हैं। उद्यान विभाग के माध्यम से होने वाले जागरूकता शिविरों में भी सेब उत्पादन के महत्व को बारीकी से बागवानों को बताया जा रहा है। इससे भी बागवानों का रुझान सेब उत्पादन की ओेर बढ़ा है। उपमंडल भरमौर में 70 प्रतिशत के करीब बागवान सेब का कारोबार करते हैं। उपमंडल में बर्फबारी वाले इलाकों में मार्च तक सेब के पौधे लगाए जा सकते हैं, जबकि निचले इलाकों में फरवरी के अंत तक लगाए जा सकते हैं। इस वजह से भी सेबों के पौधों की डिमांड उद्यान विभाग में पहुंच रही है। उद्यान विभाग के एसएमएस डा. शमशेर सिंह चंदेल ने कहा कि अभी तक 40 हजार सेब के पौधे बागवानों को वितरित किए गए हैं। सेब की पौधे लगाने के लिए उपयुक्त समय है। निचले क्षेत्रों में फरवरी तक और बर्फबारी वाले इलाकों में मार्च के अंत तक सेब के पौध लगाए जा सकते हैं। सेब उत्पादन को लेकर अधिकारियों से भी जानकारी ली जा सकती है।
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