अनहोनी से बिखरा प्रेम चंद का परिवार

Chamba Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
चंबा। जुलाहकड़ी मोहल्ला निवासी प्रेम चंद का पूरा परिवार ही बिखर कर रह गया है। अनहोनी और दुर्भाग्य ने इस परिवार को इस कदर जकड़ा है कि जहां एक ओर प्रेम चंद की पत्नी जिला अस्पताल के सेप्टिक वार्ड में उपचाराधीन है, वहीं उसकी मासूम बच्ची को अस्पताल का डंगा निगल गया। खुद प्रेम चंद भी डंगे की चपेट में आने से बुरी तरह घायल हैं। शहर में रिक्शा चलाकर मजदूरी करने वाला प्रेम और उसकी पत्नी रिश्तेदारों पर निर्भर होकर रह गए हैं। अगर किसी ने मदद को हाथ न बढ़ाया तो उनके लिए अस्पताल में बीमारी से लड़ना भी मुश्किल हो जाएगा।
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार प्रेम चंद की पत्नी अरविंद्र कौर पिछले दिनों आग की चपेट मेें आने से जल गई थी। इसका इलाज चल ही रहा था कि जले हुए शरीर पर इंफेक्शन हो गया है। इससे उसकी हालत नाजुक बनी हुई है और अस्पताल के सेप्टिक वार्ड में भर्ती है। इसी के चलते प्रेम चंद अपनी मासूम डेढ़ साल की बच्ची साक्षी को लेकर अपनी पत्नी की तीमारदारी कर रहा था कि मंगलवार दोपहर 12 बजे के करीब वह बच्ची को लेकर अस्पताल के बाहर बने खोखे में चायपान करने आया था। अचानक डंगा गिरने से अंदर बैठे एक अन्य बुजुर्ग के साथ प्रेम चंद और साक्षी मलबे में दब गए। प्रेम चंद तो पूरी तरह मलबे में दब गया था, मगर नीचे नाली होने के कारण उसका शरीर नाली में चला गया। वहीं, मासूम साक्षी मौत का शिकार होने से नहीं बच सकी। कुछ देर पहले वार्ड में चहल कदमी और खेलकूद कर रही साक्षी के डंगे की चपेट में आने की खबर सुनकर सभी सन्न रह गए। जब उसकी मौत की खबर आई तो कोई भी मौत के इस खेल पर यकीन नहीं कर पा रहा था और दुखी मन से किस्मत को कोस रहे थे। विधि का विधान ऐसा था कि साक्षी के माता-पिता दोनों ही अस्पताल में पड़े थे। उसका अंतिम संस्कार करने के लिए उसका शव प्रेम चंद के रिश्तेदारों के हवाले किया गया।
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फिर सांप के पीछे लाठी पीटने जैसी स्थिति
एक बार फिर प्रशासन सांप के जाने पर लाठी पीटने जैसी स्थिति में है। अस्पताल के जिस डंगे ने मासूम साक्षी की जान ली और दो अन्य लोगों को गंभीर रूप से घायल किया है, उस पर भारी भरकम सरिये का बोझ डाला गया था। अब इसके लिए दोषी कौन है, इसकी जिम्मेवारी लेने को कोई तैयार नहीं है। हैरानी की बात है कि डंगा गिरने के बाद इस पर पड़े सरिये को हटाने का काम तुरंत कर दिया गया। इससे पहले होने वाले नुकसान की चिंता न तो जिला अस्पताल के प्रशासन को हुई और न ही निर्माण कार्य करवा रहे बीएसएनएल के ठेकेदार को। एक बार फिर इस मामले में पीपापोती होगी और साक्षी के परिवार का दर्द दफन होकर रह जाएगा।

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एक घंटे बाद शुरू हुआ मलबा हटाने का काम
अस्पताल का डंगा गिरने के बाद मलबे में किसी ओर के दबे होने की आशंका ने लोगों और प्रशासन को परेशानी में डाले रखा। इस आशंका के बावजूद मलबे को हटाने का कार्य शुरू करने में करीब एक घंटे का समय लग गया। इस बीच निर्माण कार्य में लगी लेबर सरिया हटाती रही, मगर मलबे को हटाने के लिए प्रशासन की मदद का इंतजार होता रहा। इसके बाद कहीं जाकर जेसीबी आई और मलबा हटाया गया। इसमें पत्थरों के अलावा कुछ नहीं निकला, तब जाकर सभी ने चैन की सांस ली। उधर, तमाशबीनों ने भी पुलिस को खासा परेशान किया। राहत कार्य के बीच जमा भीड़ बीच से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी।

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