आसान नहीं अक्षम बच्चों को पढ़ाना

Chamba Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
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चंबा। जिला के सरकारी स्कूलों में शारीरिक तौर पर अक्षम बच्चाें को पढ़ाई करना आसान नहीं है। प्राइमरी और हाई स्तर के स्कूलों में अक्षम बच्चों को सीढ़ियां चढ़कर क्लासों तक पहुंचना पड़ रहा है। अभी तक स्कूलों में रैंप नहीं बन पाएं हैं। सूत्र बताते हैं कि 800 के करीब प्राइमरी और 250 के करीब हाई स्कूलों में रैंप नहीं हैं। सरकारी स्कूलों में गरीब परिवारों से संबंध रखने वाले अक्षम बच्चे पढ़ाई करते हैं। इन बच्चों के माता-पिता इन्हें खुद स्कूल में क्लास रूम में छोड़कर आते हैं।
स्कूल बिल्डिंग फंड से भी स्कूलों में रैंप बना सकते हैं। स्कूलों के मुखिया भी इस बारे में कुछ नहीं कर पाए हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि ऐसे स्कूलों की सूची ली गई है, जहां पर रैंप नहीं बन पाए हैं। इन स्कूलों को बिल्डिंग फंड से स्कूलों में रैंप बनाए जाएंगे। इसके बाद बच्चे आराम से क्लासों में पहुंच सकेंगे। अभी तक 90 प्रतिशत स्कूलों में रैंप नहीं बने हैं। अक्षम बच्चों को क्लास रूम तक पहुंचाना काफी मुश्किल हो रहा है। स्कूलों में रैंप न होने के कारण कई अपंग बच्चें स्कूल भी नहीं पहुंच पाते। वहीं, कुछेक अपंग बच्चे चल फिर न सकने के कारण व्हील चेयर में ही आते हैं। ऐसे में रैंप न होने के कारण उन्हें काफी परेशानी पेश आती है। क्लास रूमों तक पहुंचने के लिए इन्हें दूसरा का सहारा लेना पड़ता है।
शिक्षा विभाग के उपनिदेशक विजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि स्कूलों में रैंप बनाए जाएंगे। इसके लिए पैसा बिल्डिंग फंड से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले भी स्कूलों को रैंप बनाने के आदेश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि तमाम स्कूलों से फिर से एस्टिमेट लिया जाएगा।

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