सरकारी बस होती तो न होता हादसा

Chamba Updated Sun, 12 Aug 2012 12:00 PM IST
चंबा। धुलाड़ा रूट पर चलने वाली सरकारी बस बंद नहीं की गई होती तो आज एक साथ कई परिवारों के घर में मातम न होता। इस बस को बंद हुए करीब आधा साल बीत चुका है। बीच में ग्रामीणों ने पंचायतों में प्रस्ताव डालकर प्रशासन से गुहार लगाने के अलावा स्थानीय विधायक से भी कई बार बस चलाने की मांग की, मगर इतने सफल रूट पर बस नहीं चलाई जा सकी। जानकारी के अनुसार यह बस शाम को पांच बज कर बीस मिनट पर चंबा से चलती थी और सुबह धुलाड़ा से सात बजकर 10 मिनट पर धुलाड़ा से चंबा की ओर आती थी। इससे इस क्षेत्र के करीब तीन सौ गांवों को सुविधा मिलती थी। खासकर चंबा में कालेज-स्कूल, कार्यालयों और अन्य काम काज से आने-जाने वाले लोगों के लिए यह बस सुबह जाने और शाम को वापस लौटने का एक मात्र जरिया थी। इसके बंद होने से यहां चल रही निजी बस पर ही लोड था। इस बस में ओवरलोडिंग के बारे में कई बार गांव वाले और पंचायत प्रतिनिधि प्रशासन को आगाह कर चुके थे। इसके बावजूद इन गांवों की बस सुविधा पर राजनीति होती रही। कुछ अरसा पहले तो उपायुक्त के कहने पर बस चलाई भी गई, मगर दोबारा बंद कर दी गई। युवकों अजय, पंकज, वीरेंद्र, सुनील और कालू ने बताया कि पिछले दिनों भी वे आरएम एचआरटीसी और विधायक बीके चौहान से मिले थे। और बस बहाल करने की फरियाद की गई थी। इसके बावजूद उन्होंने बस नहीं शुरू करवाई। उन्होंने कहा कि अगर एचआरटीसी की बस चल रही होती तो निजी बस में ओवरलोडिंग नहीं होनी थी और यह हादसा भी नहीं होता।
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जिप में भी उठाया गया था मामला
कीड़ी वार्ड के जिप सदस्य राज सिंह ठाकुर ने बताया कि उन्होंने 11 जुलाई को आयोजित जिप की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बैठक में एडीएम की मौजूदगी में एचआरटीसी के आरएम से धुलाड़ा रूट की बस बंद किए जाने का कारण पूछा तो स्टाफ की कमी की बात कही गई। उन्होंने कहा कि जब उनसे लिखित तौर पर जवाब मांगा गया तो जवाब नहीं मिला। उन्होंने एडीएम को आगाह किया था कि बस बंद होने से निजी बस ओवरलोड हो रही है और हादसे का अंदेशा भी जताया गया था। इसके बावजूद प्रशासन हरकत में नहीं आया।

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राजनीतिक दर्भावना का आरोप
सरकारी बस बंद करने के पीछे राजनीतिक दुर्भावना का अंदेशा भी जताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस बहुल क्षेत्र होने के कारण स्थानीय विधायक यहां के ग्रामीणों की मांग पर गंभीरता नहीं दिखा रहे थे। इसी के चलते बार-बार फरियाद करने और एक बार बस चलाए जाने के बाद भी इसे बंद कर दिया गया। गुज्जर कल्याण बोर्ड के पूर्व सदस्य एवं पूर्व वार्ड पंच कालू ने बताया कि ग्रामीण लंबे अर्से से बस की मांग कर रहे थे। यहां तक कि पंचायत में भी प्रस्ताव डाले गए। इसके बावजूद बस चलाने पर गंभीरता नहीं दिखाई गई।

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