खज्जियार में रेहड़ी-फड़ी लगाने का दबाव

Chamba Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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चंबा। मिनी स्विटजरलैंड खज्जियार से खदेड़े गए रेहड़ी-फड़ी वालों को दोबारा बसाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। पर्यटन स्थल को रेहड़ी फड़ी मार्केट जैसा बनाने पर तुले इन दुकानदारों ने पहले तो खुद उपायुक्त से मिलकर रोजी रोटी छिने जाने का रोना रोया और अब राजनीतिक स्तर पर दबाव बनाने में जुटे हुए हैं। हालांकि इस पर्यटन स्थल पर स्थानीय लोगों को रोजगार देने की योजना के तहत उन्हें कुछ गतिविधियां चलाने की इजाजत मिली है। मगर जिस तरह से मिनी स्विजरलैंड को फड़ी मार्केट बनाई जा रही थी, उससे इस पर्यटन स्थल की सुंदरता को ग्रहण लगने लगा था। स्थानीय लोग मुनाफा कमाने के चक्कर में पर्यटकों को लूटने पर भी आमादा हो गए थे। यहां बाजार मूल्य से कहीं ज्यादा दामों पर खाने-पीने का सामान बेचा जाता है। इतना ही नहीं पैसा कमाने के चक्कर में यहां अवैध पैराग्लाइडिंग भी की जाने लगी थी। इसके चलते पिछले दिनों में ही जहां एक पर्यटक को गंभीर चोट लगी वहीं एक को जान से हाथ धोना पड़ा था। इस मामले में जिला प्रशासन, पुलिस व वन्य प्राणी विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेवारी थोपते नजर आए। जब दबाव बढ़ता देख वन्य प्राणी विभाग ने इस जगह से रेहड़ी फड़ी वालों और अवैध तौर पर पैराग्लाइडिंग करने वालों को खदेड़ा है तो राजनीतिक दबाव काम करने लगा गया है। बताया जा रहा है कि चुनावों के चलते राजनीतिक पार्टियां ग्रामीणों को नाराज नहीं करना चाहतीं। इस दबाव के चलते जिला प्रशासन ने तो बाकायदा बैठक भी बुला रखी है। इसमें इन ग्रामीणों को फिर से रेहड़ियां लगाने की मंजूरी देने संबंधी निर्णय लिया जाएगा। हालांकि लंबे समय से खज्जियार में रोजी रोटी कमाने वाले स्थानीय ग्रामीणों ग्रामीणों को हटाना सही नहीं है, मगर जिला प्रशासन को सेक्चुअरी एरिया के नियमों कायदों के तहत पर्यावरण की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा। लिहाजा यह मामला प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। इस बारे में उपायुक्त डा. सुनील चौधरी का कहना है कि इस संबंध में गठित कमेटी की बैठक बुलाई गई है। इसमें ही नियमानुसार निर्णय लिया जा सकेगा। वहीं वन्य प्राणी विभाग के डीएफओ राकेश कुमार ने कहा कि उन्हें बैठक की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि आरक्षित क्षेत्र होने के कारण यहां रेहड़ी-फड़ी लगाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
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