खतरा बन गई लचर स्वास्थ्य व्यवस्था

Chamba Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
चंबा। जिला में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण एक बार फिर दो गर्भवती महिलाएं मौत की दहलीज पर पहुंचा दी र्गइं। जिला अस्पताल से बुधवार को एक साथ दो गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के अंतिम समय टांडा रेफर कर मुसीबत में डाल दिया गया। एक गर्भवती को तो ऐसी हालत में रेफर किया गया, जब उसका बच्चा अटक गया था। वहीं दूसरी को हाई बीपी के कारण रेफर किया गया। इन दोनों मामलों में महिलाएं गंभीर हालत में थीं। इसे देखते हु़ए उनके परिजन भी चीखते चिल्लाते रहे। हद तो उस समय हो गई, जब ऐसी हालत में रेफर की गई महिला को एंबुलेंस भी मुहैया नहीं करवाई गई। इससे उसके परिजनों के सब्र का बांध टूट पड़ा और उन्होंने डाक्टरों से लेकर पत्रकारों तक को खरी खोटी सुनाई। हालांकि मीडिया इस संबंध में मुख्यमंत्री तक से यह मामला उठा चुका है, मगर फिर भी अस्पताल की व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। काफी देर बाद माहौल बिगड़ता देख अस्पताल प्रशासन ने दोंनो को एंबुलेंस से निजी अस्पताल में पहुंचाया। जानकारी के अनुसार अस्पताल में रीना पत्नी विपिन निवासी साहो का प्रसव हो रहा था कि बच्चा अटक गया। डाक्टरों के अनुसार अगर ज्यादा दबाव डाला जाता तो बच्चे का दम घुट सकता था। गायनी स्पेशलिस्ट न होने के कारण इस केस को आपरेशन के लिए रेफर करना पड़ा। मौके पर रीना को एंबुलेंस सुविधा भी नहीं मिल पाई। रीना के तीमारदारों के काफी हो हल्ला करने पर साढ़े 11 बजे के करीब ही महिला को एंबुलेंस सुविधा मिल पाई। तिमारदारों अजय, जितेंद्र, प्रेम, पवन, मनोज और नरेश ने एंबुलेंस मौके पर न मिलने पर अस्पताल प्रशासन को खरीखोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन एक घंटे तक एंबुलेंस सुविधा मुहैया नहीं करवा पाया था। उन्होंने कहा कि महिला को ऐसे मौके पर रेफर किया गया जब उसका आधा बच्चा बाहर आ गया था। उन्होंने कहा कि अस्पताल की लापरवाही महिला पर भारी पड़ सकती है। वहीं, दूसरे मामले में रीना पत्नी इंद्र निवासी चमूई भरमौर को बीपी हाई होने के कारण आपरेशन के लिए मेडिकल कालेज टांडा रेफर किया गया।

क्या कहना है अस्पताल प्रशासन का
अस्पताल के एमएस डा. रामकमल ने कहा कि दो महिलाओं को प्रसव करवाने के लिए टांडा मेडिकल कालेज में रेफर किया गया है। उन्होंने कहा कि एक महिला का बीपी हाई था। वहीं दूसरे मामले में बच्चे का हेड फंस रहा था। दोनों महिलाओं के सिजेरियन आपरेशन होने थे। स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण अस्पताल में यह सुविधा नहीं है।
निजी अस्पताल में हुए प्रसव
जानकारी के अनुसार इन दोनों महिलाओं को स्थानीय निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां अटका हुआ बच्चा सुरक्षित निकाला गया। जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं। वहीं दूसरे मामले में महिला का आपरेशन किया गया।

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