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आखिर क्यों नहीं खुल पाया मेडिकल कालेज

Chamba Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
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चंबा। जिले में चिकित्सा सुविधाओं का बुरा हाल है। स्वास्थ्य सेवाओं में अव्वल रहने का खिताब हासिल करने वाले प्रदेश के इस जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को चुस्त दुरुस्त नहीं किया जा सका है। जिलावासियों को मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के चंबा दौरे से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर लौटाने संबंधी आदेश जारी करने की उम्मीद है। यहां इस बात पर भी रोष है कि धूमल सरकार चंबा जैसे जरूरतमंद जिले में मेडिकल अस्पताल खोलने को प्राथमिकता नहीं दे पाई। वहीं ऐसे जिलों में मेडिकल कालेज खुलवाए गए, जहां स्वास्थ्य सेवाएं पहले ही काफी सुदृढ़ हैं।
जिले में गायनी व ईएनटी विशेषज्ञ ही नहीं हैं। एनआरएचएम के तहत बनाई गए एफआरयू में एक भी विशेषज्ञ डाक्टर तैनात नहीं हो पाया है। जिला अस्पताल में भी गायनी स्पेशलिस्ट नहीं है। खासकर गर्भवती महिलाओं को बेमौत मरना पड़ रहा है। पिछले दिनों एक माह में तीन गर्भवती महिलाओं की मौत ने जिलावासियों को काफी दर्द दिया था। इसके बावजूद डाक्टर की तैनाती नहीं हो पाई। इसी तरह ईएनटी विशेषज्ञ के पद के लिए जिलावासी लंबे अर्से से गुहार लगाते आ रहे हैं। इस पद पर तैनाती हुई, मगर डाक्टर ने आने से पहले ही कहीं और जुगाड़ फिट कर लिया। पेंशनर्स कल्याण संघ के राज्य प्रवक्ता पीसी ओबराय ने कहा कि वह यह समस्या को सीएम के समक्ष रखेंगे। चंबा प्रोग्रेसिव काउंसिल के जिला प्रधान हरिराम पुरी ने कहा कि उनका संगठन तो जिले में मेडिकल अस्पताल की मांग करते-करते थक चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव तक को लिखा व मिले, मगर चंबा को विकास के मामले में सबसे नीचे रखा जाता है। इस कारण यहां के लोग बिना इलाज मरने को मजबूर हैं। चंबा वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान आरके महाजन ने बताया कि उन्होंने जिला अस्पताल के संबंध में विस अध्यक्ष तुलसी राम को ज्ञापन दे रखा है और जल्द ही उनकी मांग पूरी होने की उम्मीद है।

1 इंसेट......
चंबा का दुर्भाग्य जो पैदा न कर सका विशेषज्ञ
इस दुर्गम जिले के कई स्वास्थ्य केद्रों में दशकों से डाक्टर नहीं पहुंच पाया है। गंभीर मरीज तो पहले पहाड़ों में स्थित गांवों से सड़क तक पहुंचते ही दम छोड़ देते हैं, अगर पहुंच जाएं तो 50 से 100 किमी दूर जिला या उपमंडल अस्पतालों तक पहुंचाने में उनकी तीमारदारों का दम निकल जाता है। जिलावासियों का कहना है कि अवार्डों पर इतराने वाली सरकार को इन सब दिक्कतों का पता है, मगर आज तक ऐसी पालिसी नहीं बना पाई, जिसके दम पर डाक्टरों को यहां सेवाएं देने के लिए मजबूर किया जा सके। वहीं चंबा का दुर्भाग्य है कि यहां से इतने विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं पैदा हो पाए, जो अपने जिला का दर्द दूर कर सकें।

2 इंसेट......
कई पद चल रहे हैं खाली
जिला में लंबे अर्से से चिकित्सकों के पद स्वीकृत नहीं हो पाए हैं। जिला अस्पताल में ही सिर्फदो सर्जन तथा अन्य विभागों का एक-एक विशेषज्ञ चिकित्सक है। इसके अलावा डलहौजी में आई स्पेशलिस्ट को छोड़ बाकी जिले के अस्पताल बिना विशेषज्ञ सेवाओें के चल रहे हैं। यहां 115 पद स्वीकृत हैं और इनमें 15 के करीब चिकित्सकों के पद खाली हैं। इसके अलावा लैब टेकभनीशियन के 58 में से 28 पद, फार्मासिस्ट के 74 में से 33 पद स्टाफ नर्सों के 117 में से 33 पद, हेल्थ मेल वर्करों के 176 पदों में से 99 पद तथा फिमेल वर्करों के 184 में से 63 पद खाली चल रहे हैं। सीएमओ चंबा डा. राकेश वर्मा ने कहा कि पदों को भरने बारे निदेशालय को अवगत करवाया गया है।

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