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जिला परिषद की बैठक में हंगामा

Chamba Updated Thu, 17 May 2012 12:00 PM IST
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चंबा। जिला परिषद की बैठक में कई अधिकारियों के उपस्थित न होने पर नौ पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार किया। सरकार के कड़े आदेशों के बावजूद जिला की इस सांसद में अधिकारियों के बार-बार अनुपस्थित रहने पर इन पार्षदों ने इस्तीफा तक देने की पेशकश कर दी है। बुधवार को स्थानीय बचत भवन में हुई जिप की बैठक में उस समय गर्माहट आ गई जब भाजपा सर्मथक पार्षदों को छोड़ बाकी के नौ पार्षदों ने पूरे अधिकारियों को उपस्थित नहीं पाया। अधिकारियों की उपस्थिति को उन्होंने पंचायती राज संस्था का अपमान मानते हुए सदन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर अधिकारी न माने तो वे आंदोलन शुरू कर देंगे। बहिष्कार करने वाले पार्षदों में कीड़ी वार्ड से राज सिंह ठाकुर, बकाण से अमित कुमार, जडेरा से संगीता, साच से इंदिरा कपूर, थल्ली से अहुमी देवी, कंगेड़ से केहर सिंह, काहरी से सुदेश ठाकुर, गरनोटा से हितेंद्र सिंह और जियुंता से पवना के साथ ही बीडीसी भरमौर के चेयरमैन गोविंद शर्मा शामिल रहे।
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इसके बाद उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए अधिकारियों के लापरवाह रवैये पर कड़ी आपत्ति जाहिर की। अमित कुमार ने कहा कि एक तो जिप की बैठक छह माह बाद हुई, ऊपर से अधिकारियों ने इसमें उपस्थित होना भी जरूरी नहीं समझा। उन्होंने कहा कि वे पहले दिन से ही अधिकारियों के इस रवैये के खिलाफ आवाज उठाते आ रहे हैं, मगर प्रदेश सरकार और अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों का यही रवैया ब्लाक समिति की बैठकों में भी चल रहा है। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र की मजबूती और विकास के लिए ही पंचायती राज सिस्टम बनाया गया है, अगर ऐसा चलता रहा तो वे अपने क्षेत्र का विकास कैसे करवा पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार इस संबंध में कड़े कदम उठाए नहीं तो उन्हें आंदोलन करना पड़ेगा। राज सिंह ठाकुर ने कहा कि उन्होंने पिछली बार प्रस्ताव डाला था कि चंबा में लगे हाइड्रो प्रोजेक्टों से प्रदेश को मिलने वाली 12 फीसदी रायल्टी में से 25 फीसदी राशि चंबा के विकास में खर्च की जाए। इस प्रस्ताव को ही गायब कर दिया गया, न तो इसे सरकार तक पहुंचाया गया और न ही उन्हें इसका जवाब मिला। उन्होंने कहा कि इसी तरह उन्होंने चंबा में गायनी विशेषज्ञ की मांग और अन्य दिक्कतों को लेकर सीएमओ से प्रश्न किया था, मगर वे ही बैठक में नहीं आए। साथ ही वे यह भी जानना चाहते थे कि गायनी विशेषज्ञ की जरूरत के लिए आरकेएस के माध्यम से निजी डाक्टरों की सेवाएं क्यों नहीं ली जा रहीं।
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