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जेबीटी प्रशिक्षित महासंघ भड़का

Chamba Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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चंबा। जेबीटी प्रशिक्षितों ने भी अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। जेबीटी प्रशिक्षित महासंघ के जिलाध्यक्ष हुगत राम खन्ना का कहना है कि विभाग व सरकार दिन प्रतिदिन गिरगिट की तरह अपना रंग बदल कर जेबीटी प्रशिक्षितों पर नये-नये नियम थोप रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त जेबीटी पिछले 18 माह से मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 1 अप्रैल 2010 को लागू हुआ था और इसमें स्पष्ट लिखा गया था कि सरकार नवंबर 2013 तक अपने स्तर पर टीईटी में छूट दे सकती है। इसके बावजूद सरकार व विभाग टेट करवाने के लिए आमदा है।
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उन्होंने कहा कि उनका बैच 2008 में शुरू हुआ था और बाकायदा इसके लिए नोटिफिकेशन 2007 में की गई थी। ऐसे में उन पर टेट थोपना उचित नहीं है। इसके अलावा सरकार ने अब वोट बैंक की राजनीति को देखते हुए बाहरी राज्यों से रातोंरात खरीदकर डिग्री लाने वाले एनटीटी व ईटीटी प्रशिक्षितों को भी जेबीटी के सामान दर्जा देकर टेट में बैठने की अनुमति दे दी है। इसका संघ कड़ा विरोध करता है। प्रशिक्षिताें का कहना है कि अगर बाहरी राज्यों से प्रशिक्षित ईटीटी व एनटीटी हिमाचल में जेबीटी के पात्र हैं, तो उनका बैच क्यों बैठाया गया था। सरकार बेरोजगारों को छलने के लिए आगामी रणनीति भी बना रही है। इसके तहत हर वर्ष जेबीटी का बैच बैठाया जाएगा।

संघ का कहना है कि अगर सरकार ने प्रशिक्षितों को एकमुश्त नियुक्तियां नहीं दीं, तो प्रशिक्षित किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसके लिए प्रदेश सरकार व लाल फीताशाही पूरी तरह से जिम्मेवार होगी। साथ ही प्रशिक्षितों ने एक विशाल रैली का आयोजन कर सरकार व विभाग के गलत निर्णयों के विरुद्ध जमकर गुब्बार निकाला। उनका कहना है कि सरकार अपने तुगलकी फरमानों को तुरंत वापस ले। जिस तरह से उनके बैच में से ही भूतपूर्व सैनिकों की नियुक्तियाें प्रदान की गई है। उसी तर्ज पर सभी जेबीटी प्रशिक्षितों को शीघ्र अति शीघ्र नियुक्तियां प्रदान की जाएं।
प्रशिक्षितों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित ज्ञापन में मांग की है कि पेचीदा विषय में स्वयं दखल देकर इसे सुलझाएं। वहीं प्रशिक्षितों का अनशन लगातार चौथे दिन में प्रवेश कर गया।

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