सरकारी सभाओं के अस्तित्व को खतरा

Chamba Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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चंबा। जिले की सहकारी सभाओं का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। हालत यह है कि जिले की 87 के करीब सहकारी सभाएं लगातार घाटे में चल रही हैं। हालांकि सभाआें को घाटे से उभारने के लिए सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं पूरा प्रयास कर रही हैं। ये सभाएं अपने स्तर पर सोसाइटी और बैंक भी चला रही हैं। सभाएं अपने सदस्यों को जरूरत पर बैंक के माध्यम से भी लोन दे रही हैं, लेकिन सदस्यों की ओर से समय पर लोन अदा न करने के कारण सहकारी सभाओं का घाटा बढ़ता जा रहा है। जिले की कुछेक जगहों में सहकारी सभाएं सोसायटी भी चला रही हैं। सोसायटी में हो रहे काम में भी सभाओं को घाटा हो रहा है। तमाम घाटों के चलते जिले में 87 के करीब सोसायटियों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। इन सहकारी सभाओं को घाटे से उभारने के लिए सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं पूरे प्रयास कर रही हैं। सदस्यों पर लोन को समय पर लौटाने पर दबाव बनाया जा रहा है, ताकि लोन के वापस आ जाने से समितियों का घाटा पूरा हो सके। साथ ही घाटे में चल रही सहकारी सभाएं लाभ कमा सकें। जिले में इस समय 160 के करीब सहकारी सभाएं हैं।
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इस संबंध में सहायक पंजीयक सहकारी सभाएं के सहायक पंजीयक तिलक राज ने कहा कि जिले में 87 के करीब सभाएं घाटे में चल रही हैं। उन्होंने कहा कि सभाएं सोसायटी और बैंक की सुविधा भी दे रही हैं, लेकिन सदस्यों की ओर से लोन वापस न करने से भी सोसायटियों का घाटा बढ़ता जा रहा है। उन्हाेंने कहा कि जिलेभर में 160 के करीब सहकारी कार्यरत हैं।
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