चित्रकार अंशु मोहन को ओहरी कला सम्मान

Shimla Bureau Updated Sun, 17 Sep 2017 09:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
चंबा।
भूरि सिंह संग्रहालय के सभागार में वीरवार को शिल्प परिषद चंबा की ओर से आयोजित डॉ. विश्वचंद्र ओहरी स्मृति व्याख्यान माला के पहले व्याख्यान के साथ दो दिवसीय कला संगोष्ठी शुरू हुई। डॉ. ओहरी पहाड़ी चित्रकला का सौंदर्यबोध शीर्षक से इस व्याख्यान में साहित्यकार डॉ. तुलसी रमण ने कहा कि किसी भी कलाविधा और कला-संस्कृति संबंधी संस्थान के संचालन और उत्तरोत्तर समृद्धि के लिए योग्य और कर्मठ व्यक्तियों की जरूरत रहती है। वरना रचनात्मकता के अभाव में संस्थानों, संस्कृति विभागों और अकादमियों में इतनी गिरावट आ जाती है कि वे निरर्थक साबित होने लगते हैं। डॉ. रमण ने कहा कि पहाड़ी चित्रकला और हिमाचल के कला संग्रहालयों की स्थापना में डॉ. ओहरी की रचनात्मक भूमिका रही है। साहित्यकार डॉ तुलसी रमण ने कहा कि किसी भी कलाविधा और कला-संस्कृति सम्बंधी संस्थान के संचालन और उत्तरोत्तर समृद्धि के लिए योग्य और कर्मठ व्यक्तियों की ज़रूरत रहती है, वरना रचनात्मकता के अभाव में संस्थानों, संस्कृति विभागों और अकादमियों में इतनी गिरावट आ जाती है कि वे निरर्थक साबित होने लगते। डॉ. रमण ने कहा की पहाड़ी चित्रकला और हिमाचल के कला संग्रहालयों की स्थापना में डॉ ओहरी की रचनात्मक भूमिका रही है। उन्होंने हिमाचल की कलाविधाओं की पहचान स्थापित करने के लिए आधारभूत काम किया। इस अवसर पर डॉ. रमण ने युवा चित्रकार अंशु मोहन शर्मा को चंबा शिल्प परिषद द्वारा स्थापित प्रथम डॉक्टर ओहरी कला सम्मान भी प्रदान किया। पुरस्कार प्रदान करते हुए डॉ. रमण ने कहा कि अंशु मोहन एक प्रतिभाशाली चित्रकार होने के साथ अकादमिक दृष्टि से भी अच्छे शिक्षित युवा हैं। प्रोफेसर कृष्णलाल शर्मा के हाथों चंबा क्षेत्र के 16 ऐसे लेखकों को सम्मान पत्र प्रदान किए गए जिनकी पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। प्रोफेसर कृष्णलाल ने कहा कि डॉ. ओहरी के चंबा चित्रकला विषयक शोध प्रबंध का भी प्रकाशन होना चाहिए। इससे पूर्व शिल्प परिषद चंबा के अध्यक्ष पद्मश्री विजय शर्मा ने कहा कि डॉक्टर ओहरी की स्मृति को क़ायम रखते हुए प्रदेश में कला संस्कृति की समृद्धि के उद्देश्य से शिल्प परिषद चंबा की ओर से व्याख्यान, पुरस्कार और संगोष्ठी के ये आयोजन प्रतिवर्ष करवाए जाएंगे। इसके साथ ही शिल्प परिषद कला विषयक पुस्तकें भी प्रकाशित करेगी। इस संगोष्ठी में लगभग 50 साहित्यकारों और कलाकारों ने भाग लिया। इनमें प्रोफेसर सोमदत्त शर्मा, सुरेंद्र मोहन सेठी, कमल प्रसाद शर्मा, धर्म मल्होत्रा, राजेश चाढ़क, सुरेश शर्मा, डॉ. विद्यासागर शर्मा, राजीव ठाकुर तथा सारंग शर्मा आदि शामिल रहे। कला संगोष्ठी के दो सत्र 18 सितंबर को होंगे।
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