श्रम कानूनों को लेकर किया धरना प्रदर्शन, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

Shimla	 Bureauशिमला ब्यूरो Updated Wed, 28 Oct 2020 10:38 PM IST
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बिलासपुर। भारतीय मजदूर संघ के वर्चुअल राष्ट्रीय अधिवेशन में सरकार की ओर से 29 श्रम कानूनों के स्थान पर 4 श्रम संहिता बनाकर लोकसभा और राज्यसभा से पारित किए जाने का विषय चर्चा का विषय रहा। भारतीय मजदूर संघ ने कहा कि उन्हें श्रम कोड बनाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन श्रम संहिताओं में श्रमिकों के हितों के विरुद्ध जो प्रावधान किए गए हैं उस पर आपत्ति है। इसके लिए बीएमएस ने धरना-प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन भी भेजा।
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ज्ञापन में मांग की है कि औद्योगिक नियोजन अधिनियम में 100 से कम श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को छंटनी और कारखाना बंदी के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं रहती है, इसको 100 की संख्या से 300 कर दिया गया है। ऐसे में कुछ बड़े उद्योगों को छोड़कर सभी उद्योगों के कर्मचारी प्रभावित होंगे। उनकी नौकरी असुरक्षित हो गई है। इस संशोधन से उद्योगों पर स्टैडिंग आर्डर भी निष्प्रभावी हो गए हैं। हड़ताल संबंधी सूचना आवश्यक सेवाओं में दिया जाना अनिवार्य था। लेकिन अब सभी के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
भारतीय मजदूर संघ ने प्रधानमंत्री से मांग की कि श्रम संहिताओं में श्रमिकों के हितों के विरुद्ध जो प्रावधान किए गए हैं उन्हें जल्द ठीक किया जाए। भारतीय मजदूर संघ ने श्रम कोड में श्रमिक हितैषी संशोधन किए जाने के लिए बुधवार को जिला कार्यालय और श्रम विभाग के कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपकर विरोध दिवस मनाया।
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