दैवीय प्रकोप या पैतृक बीमारी नहीं कुष्ठ रोग

Bilaspur Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
नयनादेवी (बिलासपुर)। जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की कुष्ठ रोग इकाई के तत्वावधान में मारकंड खंड के अंतर्गत भाखड़ा में कार्यशाला का आयोजन किया गया। महिला मंडल प्रधान उमेश कुमारी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में कई महिलाओं ने भाग लेते हुए इस बीमारी के कारणों तथा उपचार के बारे में जानकारी हासिल की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुष्ठ रोग कार्यकर्ता विवेक कुमार शर्मा ने कहा कि कुष्ठ रोग न तो पैतृक बीमारी है और न ही कोई दैवीय प्रकोप या किन्हीं पापों का नतीजा है। यह एक साधारण बीमारी है। शरीर पर तांबे तथा हलके पीले रंग के दाग पड़ना, उन पर खुजली न होना, हाथ-पांव सुन्न होना, भौहों के बाल झड़ना तथा हाथ की उंगलियों की पकड़ कमजोर होना, ये सब कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते हैं। विवेक शर्मा ने कहा कि कुष्ठ रोग का इलाज 6 से 12 माह की अवधि में हो जाता है। नियमित रूप से दवा का सेवन करने से मरीज पूर्णतया स्वस्थ हो जाता है। इसकी दवा सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। अलबत्ता, समय पर उपचार न कराने से शरीर के विभिन्न अंगों में विकृतियां आ सकती हैं। महिला मंडल तथा स्वयं सहायता समूह लोगों को इस बीमारी के लक्षणों तथा उपचार के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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