कृषि आधारित वाहनों की श्रेणी में हों ट्रैक्टर

Bilaspur Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
बिलासपुर। खेतीबाड़ी से जुड़े जिले के ट्रैक्टर मालिकों ने इस वाहन को गुड्स के बजाय कृषि आधारित वाहन की श्रेणी में लाए जाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी जमीन से रेत तथा पत्थर जैसी सामग्री ले जाने वाले ट्रैक्टरों के चालान न काटने की गुहार भी लगाई है। इन मांगों को लेकर ट्रैक्टर मालिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को एडीसी दर्शन कालिया को ज्ञापन सौंपा।
घुमारवीं उपमंडल के विभिन्न क्षेत्रों से बिलासपुर पहुंचे ट्रैक्टर मालिकों सीताराम, कुलदीप चंद, राजकुमार, अजय, बुद्धि सिंह, राकेश, मनोज, नरेंद्र, बलवंत सिंह, संजीव, रणजीत सिंह, हरीचंद, श्यामलाल, मोहर सिंह, रघुनाथ, प्यार चंद, मनसाराम, अश्वनी, नरेश, ताराचंद व कुलदीप ने कहा कि ट्रैक्टर का उपयोग केवल खेतीबाड़ी तक ही सीमित रह गया है। ऐसे में जाहिर है कि यह सीधे तौर पर किसानों से जुड़ा है। कृषि कार्यों से इतनी कमाई नहीं हो पाती कि बाकी खर्चे पूरे करने के बाद उसके माध्यम से परिवार का पालन-पोषण किया जा सके। एक ट्रैक्टर के सभी कागजात पूरे करने पर सालाना लगभग 60 हजार रुपये खर्च होता है। प्रतिमाह के लिहाज से यह राशि पांच हजार रुपये बनती है। ऐसे में आमदनी लगभग नगण्य है। लिहाजा, ट्रैक्टरों को गुड्स वाहन बनाने के बजाय कृषि आधारित वाहनों की श्रेणी में लाया जाए। ट्रैक्टर मालिकों के अनुसार उनमें से कई लोग ऐसे भी हैं, जिनकी जमीन खड्डों व नालों में बह गई हैं। जब वे लोग अपनी जमीन से अपने ही घर के लिए रेत या पत्थर जैसी सामग्री लाते हैं तो उनका चालान काट दिया जाता है। लिहाजा, कुछ ऐसी व्यवस्था की जाए कि भूमि मालिक अपनी जमीन से अपने लिए कुछ सामग्री उठा सकें। उन पर चालान की तलवार न लटकाई जाए। उन्होंने एडीसी से उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का भी आग्रह किया।

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