सेवा शर्तें एक, न्याय के तराजू दो क्यों?

Bilaspur Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
बिलासपुर। राजकीय प्राथमिक सहायक अध्यापक (पैट) संघ ने प्रदेश सरकार पर इस वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण नीति अपनाने का आरोप लगाया है। संघ का कहना है कि दोहरे मापदंड अपनाकर पैट शिक्षकों की लगातार अनदेखी की जा रही है। सवाल उठाया कि क्या सरकार और शिक्षा विभाग के पास एक जैसी सेवा शर्तों पर कार्य करने वाले कर्मचारियों से न्याय करने के लिए दो तरह के तराजू हैं।
प्राथमिक सहायक अध्यापक संघ के जिला अध्यक्ष परमजीत सिंह, महासचिव दीपलाल भट्टी और प्रेस सचिव नरेंद्र शर्मा ने कहा कि ग्रामीण विद्या उपासकों और पैट की नियुक्ति एक समान सेवा शर्तों के आधार पर हुई है। सरकार ने लगभग 1300 ग्रामीण विद्या उपासकों को 6 वर्ष का सेवाकाल पूरा होने और जेबीटी का कंडेंस कोर्स शुरू होने से पहले ही अनुबंध जेबीटी का वेतनमान दे दिया। इसके विपरीत 3439 पैट शिक्षकों को आठ वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बावजूद अनुबंध जेबीटी का वेतनमान नहीं दिया गया है, जबकि उनका जेबीटी का कंडेंस कोर्स भी पूरा होने को है। संघ के नुमाइंदों ने कहा कि पैट शिक्षक अपनी मांगों को लेकर डेढ़ माह तक शिमला में सचिवालय के बाहर भूख हड़ताल भी कर चुके हैं। सरकार की ओर से आश्वासन तो दिया गया, लेकिन अब उनके मानदेय में महज एक हजार रुपये की वृद्धि करके पल्लू झाड़ लिया गया है। यह उनके साथ अन्याय नहीं तो और क्या है। उन्हाेंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि पैट शिक्षकों को भी अनुबंध जेबीटी का वेतनमान देकर उनके साथ न्याय किया जाए।

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