गैरों पे करम, अपनों पे सितम!

Bilaspur Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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बिलासपुर। एसएमसी अध्यापक संघ ने इस वर्ग के प्रति सरकार के रवैये पर गहरा रोष जताया है। संघ का कहना है कि अन्य सभी वर्गों के हित में समय-समय पर फैसले लिए जा रहे हैं, लेकिन एसएमसी शिक्षकों की लगातार अनदेखी हो रही है। इसी कड़ी में 95 फीसदी अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी शिक्षा विभाग में समायोजित कर लिया गया है, लेकिन सरकारी स्कूलों में काम कर रहे एसएमसी अध्यापकों की एक बार फिर से उपेक्षा की गई है।
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एसएमसी शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष बाबूराम ने कहा कि प्रदेश की विभिन्न पाठशालाआें में स्कूल प्रबंधन समितियों के माध्यम से नियुक्त अध्यापक पिछले 3-4 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। नियमित शिक्षकों की तर्ज पर कार्य करने के बावजूद उनकी तुलना में उन्हें बेहद कम मानदेय मिल रहा है। एक से डेढ़ हजार रुपये मासिक मानदेय के बूते महंगाई के इस दौर में गुजारे की कल्पना भी बेमानी है। बाबूराम ने कहा कि हाल ही में सरकार ने स्कूलों में पीरियड आधार पर शिक्षकों की सेवाएं लेने का निर्णय लिया, लेकिन एसएमसी शिक्षकों को इस मामले में नजरअंदाज किया गया। ताजा घटनाक्रम में सरकार ने 95 फीसदी अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को विभाग में समायोजित करने का निर्णय लिया है, लेकिन सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे एसएमसी शिक्षक इस बार भी दरकिनार कर दिए गए। इससे वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि एसएमसी शिक्षकों की सुध लेकर उनसे भी न्याय किया जाए।
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