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मुरादें लेकर मां के दरबार पहुंच रहे भक्त

Bilaspur Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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नयनादेवी (बिलासपुर)। शक्तिपीठ श्री नयनादेवी मंदिर में शुक्रवार से श्रावण अष्टमी मेला शुरू हो गया है। मेले के पहले दिन श्रद्धालुओं की भीड़ अपेक्षाकृत कम रही। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिहाज से पुलिस प्रशासन ने पर्याप्त प्रबंध किए हैं। पूरे मेला क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। मां नयनादेवी भक्तों की हर मुराद पूरी करती है। खास कर नेत्र रोग से पीड़ितों के दुखों का निवारण होता है।
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देश के 52 शक्तिपीठों में से श्री नयनादेवी मंदिर भी एक है। श्रावण मास में लगने वाले नवरात्र मेलों में प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली अन्य राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। शुक्रवार से श्री नयनादेवी मंदिर में विधिवत श्रावण अष्टमी मेले शुरू हो गए। जिला उपायुक्त रितेश चौहान, एसडीएम एवं मेला अधिकारी दर्शन कालिया, सह मेला अधिकारी एवं एसडीएम रोहन चंद ठाकुर, मंदिर अधिकारी सुख देव ठाकुर ने पूजा अर्चना की। मेले के उपलक्ष्य पर मंदिर न्यास व पुजारी वर्ग की ओर से पाठ व जप भी शुरू किया गया।

28 जुलाई तक चलने वाले श्रावण अष्टमी मेलों में शनिवार से श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं की ओर से 45 लंगर लगाए गए। इसके अलावा 17 डाक्टरों की टीम, छह मेडिकल पोस्ट बनाए गए हैं। सूचना प्रसारित करने के लिए छह कंट्रोल बनाए गए हैं। सुरक्षा के दृष्टिगत में मंदिर में नारियल व हलवा प्रसाद चढ़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध है।

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हर मुराद पूरी करती है मां नयनादेवी
नयनादेवी (बिलासपुर)। समुद्रतल से 3535 फीट की ऊंचाई पर नयनादेवी धार पर स्थापित माता नयनादेवी मंदिर उत्तर भारत का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। श्रावण अष्टमी नवरात्र मेलों में भारी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र द्वारा भगवती सती के अंग-भंग के समय इस स्थान पर नयन गिरने के कारण ‘नयना’ नाम विख्यात हुआ। महिष मर्दिनी दुर्गा द्वारा इसी स्थान पर महिषासुर का वध किया गया था। उस समय देवताओं और ऋषियों द्वारा ‘जय नयने’ का घोष करने से यह नाम सार्थक हुआ। यह भी मान्यता है कि नैना नामक अहीर को पिंडी रूप में दर्शन देने के कारण नयना नाम प्रचलित हुआ। मां नयनादेवी भक्तों की हर मुराद पूरी करती है। विशेष से नेत्र रोग से पीड़ित लोगों के दुखों का निवारण करती है।

कैसे पहुंचें नयनादेवी
नयनादेवी (बिलासपुर)। शक्तिपीठ श्री नयनादेवी मंदिर जिला मुख्यालय बिलासपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर है। जबकि, पंजाब के नंगल से 30 किलोमीटर और आनंदपुर साहिब से 18 किलोमीटर की दूरी पर है। बस अड्डे तक पहुंचने के बाद पैदल रास्ते तक पहुंचना पड़ता है। इसके अलावा रोपवे के माध्यम से मंदिर तक पहुंचने की सुविधा है।

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