एसएमसी शिक्षकों की अनदेखी पर रोष

Bilaspur Updated Fri, 20 Jul 2012 12:00 PM IST
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बिलासपुर। एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) टीचर्स एसोसिएशन की जिला इकाई ने इस वर्ग की अनदेखी पर गहरा रोष जताया है। संघ का कहना है कि जिले के विभिन्न स्कूलों में एसएमसी के माध्यम से नियुक्त शिक्षक बीते साढ़े तीन वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। अन्य जिलों की तुलना में बिलासपुर जिले में कार्यरत इन शिक्षकाें की लगातार उपेक्षा हो रही है। इस वर्ग की मांगों और समस्याओं पर चरचा कर अगली रूपरेखा तैयार करने के लिए संगठन की बैठक 23 जुलाई को शहर के डियारा सेक्टर स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में होगी।
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एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष बाबूराम ने कहा कि स्कूल प्रबंधन समितियों के माध्यम से नियुक्त इस वर्ग के शिक्षक बीते साढ़े तीन वर्षों से जिले के विभिन्न स्कूलों में अपना दायित्व ईमानदारी से निभा रहे हैं। नियमित शिक्षकों के समान कार्य करने के बावजूद उन्हें महज 1000, 1200 या 1500 रुपये मानदेय मिल रहा है। महंगाई के इस दौर में यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। बाबूराम ने कहा कि हाल ही में सरकार ने प्रदेश के सात जिलों में पीरियड के आधार पर शिक्षकों की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है। अब एक और जिला भी इस सूची में शामिल किया गया है, लेकिन बिलासपुर जिले को इससे बाहर रखा गया है। इससे जिले में कार्यरत इस वर्ग के शिक्षक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। 23 जुलाई को लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में होने वाली बैठक में विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करके आगामी रूपरेखा बनाई जाएगी।
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