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पेयजल योजनाओं में गिरा

Updated Mon, 05 Jun 2017 12:07 AM IST
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भीषण गर्मी से सूखे जल स्रोत, योजनाएं प्रभावित
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योजनाओं में पंपिंग बाधित, 16 घंटे चलने वाली मोटरें अब चल रही सिर्फ आठ घंटे
जल स्तर 80 फीसदी जल स्तर, तीसरे दिन मिल रहा पानी
रामनाथ शर्मा
शाहतलाई (बिलासपुर)।
जिला में लगातार पड़ रही प्रचंड गर्मी से अब खड्डों सहित प्राकृतिक जल स्रोतों का से 50 फीसदी जल स्तर गिर गया है। पानी का जल स्तर गिरने से शाहतलाई क्षेत्र की पेयजल और सिंचाई योजनाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। इस वजह से लोगों को पानी के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है तो वहीं सिंचाई के लिए पानी न मिलने से फसलें सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। आईपीएच विभाग के अनुसार जिन पेयजल योजना की मोटरें पहले 16 घंटे चलती थी, वह अब केवल आठ घंटे ही चल रही हैं। इस वजह से लोगों को तीन दिन बाद पानी की आपूर्ति की जा रही है। मगर सच्चाई यह है कि कई क्षेत्रों में पिछले एक महीने से भी लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। लोगों को भी अब पानी भी तीन दिन बाद ही उपलब्ध करवाया जा रहा है।
साढ़े तीन लाख से अधिक आबादी वाले जिला बिलासपुर में आईपीएच के सदर और घुमारवी दो उपमंडल है। सदर उपमंडल में विभाग की मात्र चार-पांच पेयजल योजनाएं ऐसी है जो पूरी तरह से खड्डों पर आधारित हैं। जबकि शेष योजनाओं का आधार प्राकृतिक जल स्रोत हैं। वहीं घुमारवीं उपमंडल में इसके बिल्कुल विपरीत है। क्षेत्र में 38 पेयजल योजनाएं प्राकृतिक जल स्रोतों और 129 पेयजल और सिंचाई योजनाएं खड्डों पर आश्रित है। जिला में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते ज्यादातर प्राकृतिक जल स्रोतों और खड्डों का जल स्तर काफी नीचे गिर गया है। इसका सीधा असर पेयजल और सिंचाई योजनाओं पर पड़ रहा है। हाल ही में नगर पंचायत तलाई पेयजल योजना के बोरों से मिट्टी युक्त पानी निकलना शुरू हो गया है। जबकि झबोला पेयजल योजना की मोटर मात्र तीन घंटे, जोल पीरथान, बुखर, गंगलोह पेयजल योजना की मोटरें एक घंटा भी नहीं चल पा रही है। स्थानीय निवासी सुशील कुमार, राजेश कुमार, ईश्वर दास, मस्तराम, परसराम और प्रेमचंद का कहना है कि खड्डों का जलस्तर गिरने से क्षेत्र में लोग पेयजल की किल्लत से जूझ रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गहरा सकता है। आईपीएच विभाग के कनिष्ठ अभियंता रणवीर सिंह चंदेल का कहना है कि क्षेत्र में एक पेयजल योजना को छोड़कर सभी पेयजल योजनाएं जलस्तर गिरने से प्रभावित हो गई हैं। 50 फीसदी से अधिक जल स्तर गिर चुका है। इससे अधिकतर योजनाओं पर में पानी की पंपिंग प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि विभाग की पूरी कोशिश है कि लोगों को समान रूप से पानी की आपूर्ति की जा सके।

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