अपनी बेटी को बाल भवन भेजने की गुहार

Yamuna Nagar Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
यमुनानगर। मां की ममता पर गरीबी भारी पड़ गई है। एक गरीब दंपति ने बच्ची के पालन पोषण में असमर्थता जताते हुए डीसी से गुहार लगाई है कि बच्ची को बाल भवन में दे दिया जाए। बच्ची काफी कमजोर है और उसे इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
चेन्नई से कमाने के लिए यहां आया कोटा स्वामी तीर्थनगर में अपनी पत्नी के साथ रहता है। उसकी दो लड़कियां हैं और तीसरी लड़की का जन्म 14 नवंबर को शहर के एक निजी अस्पताल में हुआ था। कोटा स्वामी नमकीन की रेहड़ी लगाकर अपना परिवार चला रहा है। तीसरी बेटी के जन्म के बाद उसने बच्ची की परवरिश न कर सकने के कारण डीसी को प्रार्थना पत्र देकर बच्ची को बाल भवन मेें देने की गुजारिश की। डीसी ने उसके प्रार्थना पत्र को बाल कल्याण अधिकारी को मार्क कर दिया। बाल कल्याण अधिकारी ने जांच-पड़ताल के बाद डीसी के निर्देश के बाद मासूम का इलाज शुरू करवा दिया है और आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मां ने जन्म के एक महीने बाद पिलाया दूध
इस बच्ची को बुधवार को सिविल अस्पताल लाया गया। बच्ची के खून में संक्रमण की बीमारी है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. विजय दहिया की देखरेख में उसका इलाज किया जा रहा है। बच्ची के जन्म के बाद उसकी मां भी उसे साथ नहीं रखना चाहती है। उसने कई दिन तक बच्ची को अपना दूध नहीं पिलाया जिस कारण बच्ची काफी कमजोर हो गई है। जब बच्ची को अस्पताल में लाया गया तो डाक्टरों ने बच्ची की मां को दूध पिलाने को कहा लेकिन वह राजी नहीं हुई। डाक्टर ने बाहरी दूध पिलाने का प्रयास किया लेकिन बच्ची ने इसे नहीं पिया। डाक्टर ने बच्ची की मां को काफी समझाया। इसके बाद मां ने बच्ची को दूध पिलाया।
मासूम को छोड़कर रोटी के जुगाड़ में निकला बाप
कोटा स्वामी की पहले दो बेटियां हैं। बेटे की चाहत में उसे तीसरी संतान को पैदा तो कर दिया लेकिन इस बार भी बेटी होने पर उसका दिल टूट गया। ऊपर से निर्धनता के कारण उसका अपनी नवजात बच्ची से मोह पूरी तरह खत्म हो गया। नमकीन की रेहड़ी लगाने के कारण उसका गुजारा बड़ी मुश्किल से चल रहा है। दोनों बेटियां पांच साल से कम उम्र की हैं। कोटा स्वामी इनकी परवरिश भी ठीक प्रकार से नहीं कर पा रहा है। तीसरी बेटी के जन्म के कुछ दन बाद वह बीमार हो गई। कोटा स्वामी उसे निजी अस्पताल लेकर गया तो डाक्टर ने इलाज में पांच हजार रुपये का खर्च बताया। उसके लिए यह रकम बहुत बड़ी थी इसलिए वह बच्ची को घर ले आया जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई। बुधवार को बच्ची को जब सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया तो कुछ देर अस्पताल में रहने के बाद कोटा स्वामी अपनी रेहड़ी लगाने के लिए चला गया।
अब भी है बेटे का मोह
कोटा स्वामी द्वारा तीसरी बच्ची को बाल भवन में देने की गुहार के बाद जिला बाल कल्याण अधिकारी मनीषा खन्ना ने काउंसलिंग के माध्यम से कोटा स्वामी और उसकी पत्नी को बच्ची को पालने के लिए प्रेरित किया लेकिन वे राजी नहीं हुए। काउंसिलंग के दौरान इन दोनों में बेटे की चाहत नजर आई। जिला बाल कल्याण अधिकारी ने उनसे पूछा कि अगली बार फिर बेटी हो गई तो उसका क्या करोगे तो दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया।
मासूम के खून में संक्रमण : डा. दहिया
सिविल अस्पताल में बच्ची का इलाज कर रहे डा. दहिया ने बताया कि बच्ची के खून में संक्रमण है। मां का दूध न मिलने के कारण वह काफी कमजोर हो गई है। अब मां उसे अपना दूध पिलाने लगी है। बच्ची को 24 घंटे निगरानी में रखा जा रहा है।

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