थपाना नदी के सर्वे को लंदन से पहुंची टीम

Yamuna Nagar Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
यमुनानगर। जिस नदी से जिले के लोग लगभग अंजान हैं उसकी चर्चा विदेशों में हो रही है। यह नदी शोधकर्ताओं को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही है। बात की जा रही है थपाना नदी की जो पूरी तरह प्रदूषण रहित और अपने आंचल में दुर्लभ प्रजाति के जीव-जंतुओं को समाए है। सैकड़ों प्रवासी पक्षी भी इस नदी में हर साल अठखेलियां करने आते हैं।
लंदन की किंग्स यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे निशिकांत गुप्ता लंदन के टेमन रिवर रिस्टोरेशन ट्रस्ट की ओर से एक टीम के साथ थपाना नदी का सर्वे करने के लिए यहां आए हैं। टेमन रिवर रिस्टोरेशन ट्रस्ट को लंदन की जानी-मानी थेम्स नदी के पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है जिसके कर्ताधर्ता जाने-माने पर्यावरणविद् राबर्ट आट्स हैं। थपाना नदी के बारे में पता चलने पर राबर्ट आट्स तीन-चार बार थपाना नदी को देखने और जानकारियां एकत्र करने के लिए यहां आ चुके हैं। इस टीम में दिल्ली के पीस इंस्टीट्यूट चैरिटेबल ट्रस्ट के योजना सहायक भीम और उनके सहयोगी भी हैं। पीस इंस्टीट्यूट चैरिटेबल ट्रस्ट यमुना नदी को प्रदूषण रहित करने में कई साल से काम कर रही है।
टीम के सदस्य थपाना नदी के करीब चार किलोमीटर के क्षेत्र में सर्वे कर रहे हैं। इस दौरान नदी में पाई जानी वाली विभिन्न प्रजाति की मछलियों का डेटा एकत्र किया जा रहा है। नदी और उसके किनारे आने वाले प्रवासी और देसी पक्षियों का भी आंकड़ा इकट्ठा किया जा रहा है। यह टीम नदी के पानी की शुद्धता की भी जांच कर रही है। लंदन से आए निशिकांत गुप्ता ने बताया कि नदी के पानी की शुद्धता पहाड़ों की नदियों में बहने वाले पानी सरीखी है। यह पानी पूरी तरह प्रदूषण रहित और पीने योग्य है। नदी क्षेत्र में मैना की कामन स्ट्रालिंग प्रजाति पाई गई है जो काफी दुर्लभ है। इसके अलावा ईगल की चार-पांच प्रजाति नदी क्षेत्र में पाई गई हैं। पीस इंस्टीट्यूट चैरिटेबल ट्रस्ट के योजना सहायक भीम ने बताया कि नदी में मछली की कालबांस और गोल्डन महाशीर प्रजाति पाई गई है जो काफी दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि थपाना नदी यमुना की सहायक नदी है और इसका स्रोत ग्राउंड वाटर है। देश भर में इस तरह की नदी बहुत कम देखने को मिलती हैं।

ग्रामीणों ने नदी को प्रदूषण से बचाया
थपाना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए कनालसी और मंडोली गांव के लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। इसके लिए गांववालों ने पीस इंस्टीट्यूट चैरिटेबल ट्रस्ट यमुना सेवा समिति का गठन कर थपाना नदी को प्रदूषण रहित रखने का बीड़ा उठाया है। इसके तहत गांव का गंदा पानी थपाना में नहीं जाने दिया जाता है। ग्रामीण नदी के किनारे समय-समय पर प्लांटेशन करते हैं। नदी के किनारों पर जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण इस नदी की पूजा करते हैं और नदी में किसी को मछली पकड़ने नहीं दी जाती है। इस समिति के प्रधान किरणपाल राणा हैं। इसके अलावा अनिल शर्मा महासचिव, महीपाल कोषाध्यक्ष और इंद्रपाल, पंकज राणा सुमेर और अरविंद्र सदस्य हैं। कुसुमलता महिला मंडल की प्रधान हैं। किरणपाल राणा ने बताया कि थपाना नदी की लंबाई करीब 15 किलोमीटर है। यह लाकड़ गांव के पास से आरंभ होकर मजाहद वाला, लाकड़, भीलपुरा, तेलीपुरा, रामपुर खादर, जयरामपुर, दमोदुपरा, मंडोली से कनालसी होते हुए पहले सोमनदी में मिलती है और फिर थोड़ा आगे आकर यमुना नदी में आकर मिलती है। ठंड आरंभ होते ही प्रवासी पक्षी यहां आने शुरू हो जाते हैं और गर्मियां आरंभ होने तक यहीं रहते हैं। किरणपाल राणा ने बताया कि राबर्ट आट्स के अलावा आस्ट्रेलिया से पर्यावरणविद् डा. पीटर और जर्मनी के तीन पर्यावरणविद् नवंबर में यहां आ चुके हैं।

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