हिंसा उन्मूलन दिवस को भूला विभाग

Yamuna Nagar Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
जगाधरी। महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सरकार ने जिला स्तर पर महिला एवं बाल विकास विभाग का गठन किया हुआ है लेकिन इस विभाग के अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने वाले महिलाओं के खिलाफ हिंसा उन्मूलन दिवस के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वहीं दूसरी ओर महिलाओं पर अत्याचार करने वालों से निपटने के लिए जिला पुलिस ने महिला हेल्प लाइन नंबर शुरू किया हुआ है लेकिन 11 अक्तूबर से अब तक इस नंबर पर कितनी लड़कियों और महिलाओं ने कॉल कर मदद की गुहार लगाई है, इस बारे में कोई भी अधिकारी बोलने के लिए तैयार नहीं है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए प्रशासनिक अधिकारी कितने गंभीर हैं।
25 नवंबर को विश्व भर में अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के रूप में मनाया जाता है। महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों से निपटने के लिए जिला स्तर पर पर प्रदेश सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग का गठन किया है लेकिन हैरानी की बात है कि इस विभाग के अधिकारियों को उपरोक्त दिवस के बारे में कोई जानकारी नहीं है। महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रोग्राम अफसर कमलेश गौतम का कहना है कि उन्हें तो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में पता है, लेकिन उपरोक्त दिवस की शुरुआत कब हुई, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। अगर उन्हें पहले से पता होता तो वे शायद महिलाओं को जागरूक करने के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित करवा लेतीं।
दावे नहीं बुनियादी सुविधा चाहिए
महिलाओं पर अत्याचार करने वालों से निपटने के लिए जिला पुलिस ने 11 अक्तूबर को महिला हेल्प लाइन नंबर 8818000108 की शुरुआत की थी। तब से लेकर अब तक इस नंबर पर कितनी लड़कियों और महिलाओं ने कॉल कर मदद की गुहार लगाई है, इसके बारे में कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जब भी उन्हें इस नंबर पर किसी की कॉल आती है तो तुरंत संबंधित थाने और चौकी प्रभारी को सूचित कर दिया जाता है लेकिन ट्विनसिटी की लड़कियों का कहना है कि उन्हें दावे नहीं, बुनियादी सुविधा चाहिए। मॉडल टाउन निवासी सुमन और आकृति का कहना है कि कई बार हेल्प लाइन नंबर पर फोन करते हैं तो पहली बारी में कोई उठाता नहीं। इतनी देर में उनसे छेड़छाड़ करने वाला भाग चुका होता है। रविवार को अमर उजाला कार्यालय से 6 बजकर 36 मिनट पर हेल्प लाइन नंबर पर कॉल की गई, तो पहली बार में उसे किसी ने नहीं उठाया। दूसरी बार कॉल करने पर उसे महिला कर्मचारी ने रिसीव किया।
जिले में सुरक्षित नहीं महिलाएं
समाजसेवी संस्था उत्थान की निदेशिका अंजू बाजपेयी का कहना है कि जिले में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। अगर किसी महिला को रात को घर से बाहर निकाल दिया जाए तो वह कहां जाएगी। इसके बारे में कोई व्यवस्था नहीं है। सरकार कागजों में महिलाओं का उद्धार कर रही है। रात के समय अभी भी लड़कियां घर से बाहर निकलने में डरती हैं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून तो बने हैं लेकिन उन्हें लागू करने में हमेशा पुलिस का ढुलमुल रवैया रहता है। सिस्टम की दृढ़ इच्छा शक्ति नहीं है कि महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों पर अंकुश लगे।

वर्जन
महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस कब से मनाना शुरू किया गया, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। अगर पहले से पता होता तो शायद कोई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लिया जाता।
-कमलेश गौतम, जिला प्रोग्राम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, यमुनानगर।

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