प्रदूषण फैलाने वाले 21 कालेजों को नोटिस

Yamuna Nagar Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
जगाधरी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने हाल ही में जिले के 21 कालेजों को सील करने के लिए नोटिस भेजा है। विभाग के मुताबिक इन कालेजों में जल व ध्वनि प्रदूषण मानकों के अनुसार नहीं हैं। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि अगर कालेज प्रबंधन ने समय रहते बोर्ड के पास कंसेंट के लिए आवेदन नहीं किया, तो उन्हें सील कर दिया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दायरे में आने वाले सभी कालेजों को बोर्ड से हर साल कंसेंट लेना अनिवार्य है। इसके तहत यह देखा जाता है कि कालेज द्वारा गंदे पानी का डिस्चार्ज किस प्रकार से किया जा रहा है। इसके अलावा यह भी देखा जाता है कि उनके वहां पर जो जेनरेटर सेट लगे हैं, वे साउंड प्रूफ हैं या नहीं। बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक कालेज प्रबंधन गंदे पानी को साफ किए बिना डिस्चार्ज नहीं कर सकता। इसके लिए कालेज में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा होना अनिवार्य है। इसके अलावा जेनरेटर सेट ध्वनि प्रदूषण न करें, उन पर अकोस्टिक चैंबर लगा होना चाहिए।

नोटिस भेज दिया 7 से 15 दिन का समय
बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि जिन कालेजों को सील करने के लिए नोटिस भेजा गया है, उन्हें 7 से 15 दिनों के अंदर कंसेंट अप्लाई करने के लिए कहा गया है। बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक जिन कालेजों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिनके यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है।

इस प्रकार से दायरे में आते हैं कालेज
बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक जिस कालेज में प्रतिदिन 10 हजार लीटर या इससे ज्यादा पानी का डिस्चार्ज होता है, वह कालेज बोर्ड के दायरे में आता है। बोर्ड अधिकारियों का मानना है कि अगर किसी कालेज में विद्यार्थियों, टीचर्स व स्टाफ की संख्या 300 हैं, तो वहां पर रोजाना 10 हजार लीटर पानी डिस्चार्ज होता है। ऐसे कालेजिज को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाना अनिवार्य है। इसके अलावा कालेज में लगे जेनरेटर सेट पर अकोस्टिक चैंबर लगा होना अनिवार्य है, ताकि जब उसे चलाया जाए, तो वह ज्यादा मात्रा में ध्वनि प्रदूषण न करें।

गंदे पानी से जमीन को पहुंचता है नुकसान
प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि अगर गंदे पानी को जमीन पर छोड़ दिया जाए, तो उससे जमीन को नुकसान पहुंच सकता है। क्योंकि गंदे पानी में हानिकारक वैक्टीरिया होते हैं। अगर उसे सीवरेज में छोड़ा जाएगा, तो जाहिर सी बात है, प्रशासन द्वारा लगाए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर एकाएक लोड बढ़ जाता है, जो ठीक नहीं है। इसके अलावा जेनरेटर पर अकोस्टिक चैंबर न होने पर ध्वनि प्रदूषण की मात्रा अत्याधिक 100 डेसीबल से ज्यादा तक बढ़ जाती है, जो विद्यार्थियों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है।

कोट
बोर्ड के नॉर्म्स पूरे न करने पर जिले में 21 कालेजों को सील करने के लिए नोटिस भेजा गया है। इनमें से 10 कालेजों ने कंसेंट के लिए अप्लाई किया है। यदि कालेजों ने जल्द ही अप्लाई नहीं किया, तो उनकी सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। जो भी बोर्ड के नॉर्म्स की अवहेलना करेगा उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
सुमित अमरोही, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यमुनानगर।

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