सील फैक्टरी में उत्पादन जारी

Yamuna Nagar Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
यमुनानगर। रिहायशी क्षेत्र में चल रही एक मेटल फैक्टरी को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दो दिन पहले सील कर दिया था लेकिन इस इकाई में उत्पादन कार्य बदस्तूर जारी है। आसपास रहने वाले लोग इस फैक्टरी के बारण बीमार हो रहे हैं, वहीं लोगों के घरों में कंपन से दरारें आ गई हैं। अंबाला-जगाधरी रोड पर स्थित मालवीय नगर में एल्युमीनियम के बर्तन बनाने वाली एक बड़ी फैक्टरी के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई की थी। फैक्टरी की चेकिंग करने पर इसमें प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले उपकरण नहीं पाए गए। साथ ही फैक्टरी को चलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति नहीं ली गई थी। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों ने मौके पर फैक्टरी की करीब आधा दर्जन हैवी प्रेस, भट्टियों, एसिड टैंक, जनरेटर आदि को सील कर दिया जबकि मोहल्ले वासियों का कहना है कि प्रदूषण विभाग की कार्रवाई के बाद भी फैक्टरी में काम चल रहा है।
इस फैक्टरी में एल्युमीनियम के बर्तनों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। इसमें कई हैवी प्रेस और एसिड टैंक हैं। मोहल्ला वासियों का कहना है कि फैक्टरी में देर रात तक काम चलता है। दिलचस्प बात यह है कि यह इकाई बिना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लिए चलती रही, लेकिन विभाग के अधिकारियों को इसकी खबर नहीं लगी। रिहाइशी इलाके में चल रही इस फैक्टरी के खिलाफ नगर निगम अधिकारी भी आंखें मूंदें रहे।

एसिड का इस्तेमाल होता है
मालवीय नगर निवासी सुरेंद्र मदान का कहना है कि यह फैक्टरी करीब दो साल पहले बनी थी। फैक्टरी के निर्माण के समय मोहल्ले के लोगों ने इसका विरोध किया था। उस समय फैक्टरी मालिक ने आश्वासन दिया था कि फैक्टरी में सिर्फ पैकिंग का कार्य होगा लेकिन धीरे-धीरे बड़-बड़ी मशीनें लगाकर बर्तनों का उत्पादन शुरू कर दिया गया। फैक्टरी में बड़े पैमाने पर एसिड इस्तेमाल होता है। जहरीले धुएं के कारण आस-पड़ोस के लोगों को अस्थमा, आंखों में जलन, त्वचा रोग और एलर्जी की शिकायत हो गई है।
मालवीय नगर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रायसिंह ने बताया कि फैक्टरी में चलने वाली भारी-भरकम प्रेसाें के कारण काफी दूर तक कंपन होता है। इससे कई घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। फैक्टरी में होने वाले शोर के कारण बच्चे घरों में पढ़ नहीं पाते। मशीनों की धमक के कारण बुजुर्गों को काफी परेशानी होती है। फैक्टरी की शिकायत प्रदूषण विभाग को की गई थी जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने फैक्टरी के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन फैक्टरी की मशीनों को सील करने के बाद भी फैक्टरी में काम चल रहा है।

इनके घरों में आईं दरारें
मनीष गोयल, हरचरन सिंह ओबराय, राकेश, सुधीर जिंदल, प्रेम धमीजा।
इन्हें हो गई बीमारी
राकेश मोदगिल का घर फैक्टरी से सटा हुआ है। फैक्टरी के प्रदूषण के कारण राकेश की पत्नी नीतू मोदगिल और उनकी बेटी को अस्थमा की शिकायत हो गई है। फैक्टरी के पास रहने वाली सुदेश को एलर्जी की शिकायत है। सुरेंद्र मदान और उनकी पत्नी को त्वचा संबंधी शिकायत है। सुधीर जिंदल को गले में एलर्जी हो गई है। अनूप की आंखों में हर वक्त जलन रहती है। मनीष को अस्थमा और सांस की बीमारी हो गई है।

फिर जांच करेंगे
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ शैलेंद्र कुमार अरोड़ा ने बताया कि एनओसी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी उपकरण न होने के कारण फैक्टरी की मशीनों, एसिड टैंक और जनरेटर आदि को सील कर दिया गया था। फैक्टरी का बिजली कनेक्शन काटने के लिए विभाग की ओर से बिजली निगम को भी लैटर लिखा गया है। यदि फैक्टरी में उत्पादन संबंधी कार्य हो रहा है तो इसकी चेकिंग करवा ली जाएगी।

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