एक्सपायरी डेट की दवा देने पर जुर्माना

Yamuna Nagar Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
करनाल। एक्सपायरी डेट की दवा देने पर डॉक्टर और केमिस्ट को उपभोक्ता अदालत ने पीड़ित को एक लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इन आदेशों में एक माह के अंदर पीड़ित को राशि देने को कहा गया है। खास बात यह है कि बिना वकील के पीड़ित ने खुद अपने केस की पैरवी की और कोर्ट में जीत भी गया।
जगाधरी निवासी भगवानदीप ने उपभोक्ता फोरम से 26 मई 2009 को शिकायत की थी कि उसे तेज बुखार होने के कारण अस्पताल में इलाज के लिए जाना पड़ा था। बुखार का इलाज के लिए वो गाबा अस्पताल यमुनानगर चला गया। डाक्टर ने खून की जांच कराने को कहा और इलाज शुरू कर दिया। बताया गया कि प्लेटलेट कम हैं और फोरकैन नाम का टीका लवाने का सुझाव दिया। डाक्टर ने बताया कि उसके एक लाख 28 हजार प्लेटलेट हैं, जोकि काफी कम हैं। 5 मार्च 2009 को डाक्टर गाबा ने टीका लगा दिया, जो अस्पताल में बने फेयर प्राइस मेडिकल स्टोर से खरीदा गया था।

अगले दिन एक्सरे में निमोनिया का खुलासा
लेकिन अगले ही दिन छह मार्च 2009 को एक्सरे किया गया, तो निमोनिया से पीड़ित पाया गया। इस दौरान जांच में पाया गया कि प्लेटलेट घटकर 16 हजार रह गए हैं। डाक्टर ने बड़े अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी, इसके बाद पीड़ित दिल्ली स्थित मैक्स अस्पताल चला गया। पीड़ित के पिता को इसी दौरान पता चला कि जो दवाई डाक्टर के यहां दी गई वह एक्सपायरी डेट की थी। दिल्ली में भगवानदीप के इलाज पर दो लाख 11 हजार रुपये खर्च आया और इलाज के नाम पर डाक्टर गाबा ने 60 हजार रुपये लिए। बीमारी का इलाज होने के बाद भगवानदीप उपभोक्ता अदालत पहुंच गया।

सीएमओ ने कराई थी जांच
भगवानदीप की शिकायत पर गौर करते हुए उपभोक्ता अदालत ने पहले इस मामले में यमुनानगर के सीएमओ को जांच आदेश दिए। इस पर सीएमओ ने तीन डाक्टरों का जांच दल बना दिया। रिपोर्ट में एक्सपायरी डेट की दवा में टाइपिंग मिसटेक बता दिया गया। सुनवाई के दौरान उपभोक्ता अदालत करनाल के अध्यक्ष एमएम शर्मा ने सीएमओ की रिपोर्ट को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सीएमओ को एक्सपाइरी इंजेक्शन की जांच के लिए नहीं गया था, अपितु पूरे मामले में लापरवाही की जांच के लिए कहा गया था। पर सीएमओ ने जांच का दायरा ही सीमित कर दिया।

अदालत ने माना की दवा एक्सपायरी डेट की
इसके बाद उपभोक्ता अदालत ने यह मान लिया कि दवा एक्सपायरी डेट की ही थी। फैसले में अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अस्पताल में स्थित केमिस्ट शाप का मालिक भी डाक्टर ही है। अदालत ने इसे सेवा में त्रुटि और अनुचित व्यापार व्यवहार माना और दोनों को दोषी करार देते एक लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दे दिए। यह राशि एक माह में पीड़ित को देने के लिए कहा गया है।

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