मंडी में लुट रहे किसान

Yamuna Nagar Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
यमुनानगर। किसानों को धान बेचने के लिए जगाधरी अनाज मंडी में दो-दो दिन तक रुकना पड़ रहा है क्योंकि मंडी में धान के उठान की गति काफी धीमी है। नमी वाले धान को सुखाने के लिए मंडी में जगह नहीं मिल पा रही है क्योंकि मंडी के फड़ और शेड के नीचे गेहूं पड़ा है। किसानों को मजबूरन सड़कों पर धान डालना पड़ रहा है। मंडी में अव्यवस्था हावी है। मंडी की सड़कें भी टूटी हैं। नमी वाले धान के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। आढ़तियों का कहना है कि कंबाइन द्वारा काटी गई धान में 23 से 28 प्रतिशत तक नमी पाई जा रही है। इस नमी वाले धान का खामियाजा किसानों को धान की बिक्री में होने वाली कटौती से भुगतना पड़ रहा है। अब तक जगाधरी अनाज मंडी में 2,01275 क्विंटल धान की आवक हुई है।
28 प्रतिशत तक नमी
मंडी में आ रहे धान में 28 प्रतिशत नमी है। सरकार की ओर से 17 प्रतिशत तक की नमी वाले धान की ही खरीद की जा रही है। इस समय मंडी में 23 से 28 प्रतिशत तक नमी वाला धान पहुंच रहा है।
नमी वाले धान पर कटौती
नमी वाला धान बेचने पर 10-11 किलो प्रति क्विंटल पर कटौती होती है। यदि धान में 17 प्रतिशत से अधिक नमी है तो प्रति प्रतिशत के साथ एक किलो धान घाटे में बिकता है। यदि धान में 28 प्रतिशत नमी है तो समझो किसान को एक क्विंटल धान से केवल 89 किलो धान की ही कीमत मिलेगी। अर्थात 28 प्रतिशत नमी होने पर 11 किलो प्रति क्विंटल की कटौती होगी।

नमी वाले धान की कटौती
नमी मात्रा
18 प्रतिशत 1 किलोग्राम
19 प्रतिशत 2 किलोग्राम
20 प्रतिशत 3 किलोग्राम
21 प्रतिशत 4 किलोग्राम
22 प्रतिशत 5 किलोग्राम
23 प्रतिशत 6 किलोग्राम
24 प्रतिशत 7 किलोग्राम
25 प्रतिशत 8 किलोग्राम
26 प्रतिशत 9 किलोग्राम
27 प्रतिशत 10 किलोग्राम
28 प्रतिशत 11 किलोग्राम
29 प्रतिशत 12 किलोग्राम

किसानों का हो रहा शोषण
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश सचिव विजय मेहता का कहना है कि धान में नमी का बहाना बनाकर मंडी में किसानों को आर्थिक शोषण किया जा रहा है। खरीद एजेंसी के अधिकारी, आढ़ती और मिलर मिलकर किसानों को लूट रहे हैं।
शहजादपुर से मंडी में धान लेकर किसान प्रदीप कुमार का कहना है कि गांव में लेबर नहीं मिलने से मशीन से धान की कटाई जिसमें कुछ नमी थी लेकिन मंडी में धान सुखाने के लिए जगह नहीं मिली। दो दिन से मंडी में धान की रखवाली कर रहे हैं।
दमोपुरा से धान लेकर आए किसान जोगिंद्र सिंह का कहना है कि अब तो मंडी में पांव रखने की भी जगह नहीं रही। मंडी में जगह नहीं होने के कारण सड़क पर धान डालना पड़ रहा है।
बहरामपुर से धान लेकर आए किसान कर्मचंद का कहना है कि नमी वाले धान की कटौती होने से किसान को आर्थिक नुकसान हो रहा है। बरसात कम होने से पहले ही फसल कम हुई है, ऊपर से कटौती के नाम पर किसानों का शोषण किया जा रहा है।

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