कानून का डर पैदा होने से ही रुकेगी छेड़छाड़

Yamuna Nagar Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
यमुनानगर। एसडी इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी की छात्राओं का मानना है कि छेड़छाड़ की घटना पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन को शिक्षण संस्थानों में जाकर लड़कियों से संबंधित सुरक्षा व्यवस्था और टोल फ्री नंबर के बारे में सेमिनार के माध्यम से जानकारी देनी चाहिए। प्रशासन को छेड़छाड़ करने वाले लोगों के दिलों में डर पैदा कर आरोपी को सजा दिलवानी चाहिए।

एसडी इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी की डायरेक्टर डा. शैली गुप्ता का कहना है कि छेड़छाड़ की घटना को रोकने के लिए पुलिस फोर्स बढ़ानी चाहिए। शहर में जगह-जगह चेक पोस्ट लगाकर छेड़छाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए। जल्दी कार्रवाई नहीं होने के कारण छेड़छाड़ की घटना में बढ़ोतरी हुई है। छेड़छाड़ की घटना पर अंकुश लगाने के लिए सभी जिलों में महिला सेल बनाकर समय-समय पर शिक्षण संस्थानों में लड़कियों को जागरूक करना चाहिए।

एसडी इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी की छात्रा ईशा गर्ग का कहना है कि छेड़छाड़ के लिए कुछ हद तक टेक्नालॉजी भी जिम्मेदार है। सूचना क्रांति के इस दौर में कम उम्र की लड़कियों और लड़कों के पास मोबाइल फोन और इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हो गई है। इस कारण कम उम्र के विद्यार्थियों के हाथों में मोबाइल फोन आ गया है, कम उम्र के विद्यार्थी लड़की का नंबर पता कर फोन के माध्यम से छेड़छाड़ करते हैं। मां-बाप को कम उम्र के विद्यार्थियों को मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा नहीं देनी चाहिए।

एसडी इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी की छात्रा मानसी त्रिपाठी का कहना है कि शहर में छेड़छाड़ अधिक होने के कारण शाम पांच बजे ही घर लौटना पड़ता है। एजूकेशन हब होने के कारण दूसरे राज्य की लड़कियां हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती हैं। दूसरे राज्य से आयी छात्रा असुरक्षा की भावना के साथ-साथ सड़कों पर निकलती हैं। मानसी का कहना है कि छात्राओं की सुरक्षा के लिए टोल फ्री नंबर की जानकारी प्रशासन को शिक्षण संस्थानों में जाकर देनी चाहिए। प्रशासन को शहर के सभी हॉस्टल और पीजी में फोन करके छात्राओं की सुरक्षा संबंधी जानकारी हासिल करनी चाहिए।

एसडी इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी की छात्रा शेफाली शर्मा का कहना है कि प्रशासन को छेड़छाड़ करने वाले लोगों में कानून का डर पैदा करना चाहिए। छेड़छाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होने के कारण आरोपी का मनोबल बढ़ जाता है, वह कानून से छूटने के बाद दोबारा लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करता है। प्रशासन को छेड़छाड़ करने वाले युवक को थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करते हुए सजा देनी चाहिए। तभी ऐसे मनचले लोगों के दिलों में कानून का डर पैदा होगा और वेे किसी लड़की के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

एसडी इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी की छात्रा कुलजीत कौर का कहना है कि छेड़छाड़ की घटना के पीछे लड़कियों का डर भी जिम्मेवार है। छेड़छाड़ करने वाले लोगों के द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने के डर से अधिकतर लड़कियां छेड़छाड़ का विरोध नहीं करतीं। लड़कियां जब खुद को सुरक्षित महसूस करेंगी तभी छेड़छाड़ का विरोध करेंगी। प्रशासन को लड़कियों के अंदर सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए छेड़छाड़ करने वाले लोगों के खिलाफ कड़े नियम बनाने चाहिए।

-एसडी इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ऑफ टेक्नोलॉजी की छात्रा अमनदीप कौर का कहना है कि छेड़छाड़ के लिए कुछ हद तक लड़कियों की परवरिश करने का तरीका भी जिम्मेवार है। भारत में अधिकतर मां-बाप लड़कियों को बचपन से ही अबला की तरह पालन-पोषण करते हैं। इस कारण लड़कियों के अंदर शुरू से ही कमजोर का भय व्याप्त हो जाता है। कुछ लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की घटना होने पर घरवाले पीड़ित को घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा देते हैं। लड़कियों को बचपन से ही आत्मविश्वास और सेल्फ डिपेंडेंट बनाना चाहिए, तभी लड़कियां किसी अन्याय का विरोध करेंगी।

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