सिपाही को रहस्यमय हालात में लगी गोली, मौत

Yamuna Nagar Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
पानीपत। नगर के असंध नहर नाका पुलिस में तैनात सिपाही की रहस्यमय परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई। गोली गश्त से लौटे एक एएसआई की सर्विस पिस्टल से चली थी। पुलिस के आला अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। सिपाही प्रवीण की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस अधिकारियों ने मौत को इत्तफाकिया करार दिया है। राजकीय सम्मान के साथ प्रवीण के शव का संस्कार करा दिया।
2005 के बैच का सिपाही प्रवीण माडल टाउन थाने के अंतर्गत असंध नहर नाका चौकी में तैनात था। वह मूल रूप से सोनीपत के गांव पिपली खेड़ा का रहने वाला है। उसके पिता सुखबीर सिंह एसएसपी कार्यालय पानीपत में उप निरीक्षक हैं। रात करीब तीन बजे एएसआई महेश्वर गश्त से वापस आया था। उसने प्रवीण को अपना सर्विस पिस्टल दे दिया और बाथरूम चला गया। प्रवीण सर्विस पिस्टल देखने लगा। इसी दौरान गोली चल पड़ी और गोली उसकी खोपड़ी में कान के ऊपर लग गई। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिसकर्मी आवाज सुनकर वहां पहुंचे तो वे प्रवीण का खून से लथपथ शरीर देखकर घबरा गए। उन्होंने उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी।
सूचना पाकर थाना प्रभारी जितेंद्र राणा और डीएसपी वीरेंद्र दलाल मौके पर पहुंचे। एफएसएल की टीम ने खून के नमूने लेकर जांच के लिए भेज दिए। पुलिस अधिकारियों ने इसकी सूचना उसके परिजनों को दी। परिवार में सूचना पाते ही कोहराम मच गया और उसके पिता सुखबीर सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया। शनिवार दिन में परिजनों की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम कराया।

हंसते खेलते परिवार में छाई मायूसी
प्रवीण मूल रूप से गन्नौर, सोनीपत के गांव पिपली खेड़ा का रहने वाला है। उसके पिता सुखबीर सिंह एसपी कार्यालय पानीपत में उप निरीक्षक हैं। एक भाई बैंक में कार्यरत है। प्रवीण की करीब पांच साल पहले शादी हुई थी। उसके पास साढ़े तीन साल की एक लड़की व डेढ़ साल का एक लड़का है। प्रवीण की हादसे में मौत होने के बाद हंसते खेलते परिवार में मातम पसर गया।

कुछ अनसुलझे सवाल
- पुलिस चौकी में सिपाही प्रवीण अल सुबह अधिकारी के पिस्टल के साथ क्या कर रहा था?
- यह आत्महत्या नहीं तो किसी अन्य कर्मचारी ने तो वारदात को अंजाम नहीं दे दिया?
- इसे इत्तफाकिया मानें तो गोली उसकी कनपटी के ऊपर कैसे लगी?
- मरने से पहले उसने अपने कई दोस्तों से फोन पर बात की, वे कौन थे और क्या बात हुई?

पुलिसकर्मी पहले भी खा चुके हैं धोखा
पुलिस प्रशिक्षण में एक जवान को हथियारों सहित अन्य तकनीकी मामलों का पूरा प्रशिक्षण दिया जाता है। ट्रेनिंग के आखिर में उनका टेस्ट भी होता है। टेस्ट में पास होने के बाद उसको उसके काबिल माना जाता है। बावजूद इसके पुलिसकर्मी हथियारों के साथ छेड़छाड़ कर लगातार धोखा खा रहे हैं। प्रवीण की मौत को इत्तफाकिया मानें तो यह जिला पुलिस में इस तरह का दूसरा केस है। जब पुलिसकर्मी अपने हथियार को गलती से चला बैठे। इससे पहले भी एक पुलिसकर्मी दो लोगों को अस्पताल पहुंचा चुका है। थाना सदर पुलिस के सिपाही ने बराना गांव में सरपंच की सुरक्षा में तैनात रहते समय 12 सितंबर को कारबाइन चला दी। इसमें संजय पंच और पेंशन लेने पहुंचे एक बुजुर्ग रामनिवास को गोली लग गई। दोनों को शहर के एक निजी अस्पताल में भरती कराया गया था।

वर्जन
‘प्रवीण गश्त से लौटे एएसआई की पिस्टल चेक कर रहा था। उससे इत्तफाकिया गोली चल गई। इसमें उसकी मौत हो गई। पुलिस ने 174 के तहत कार्रवाई कर पोस्टमार्टम करा दिया। पुलिस ने सिपाही का राजकीय सम्मान के साथ दाह संस्कार करा दिया।
नरेंद्र सिंह, पुलिस प्रवक्ता, पानीपत

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