बारिश होते ही हाल बेहाल v

Yamuna Nagar Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
जगाधरी। गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था लचर होने के कारण हल्की बारिश होते ही सिविल लाइन पर दो से तीन फीट तक पानी भर जाता है। क्षेत्र के लोग पिछले 30 वर्षों से पानी का दंश झेल रहे हैं। हालांकि जगाधरी नगर परिषद से नगर निगम (यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम) बन चुका है, लेकिन अभी तक लोगों को इस समस्या से छुटकारा नहीं मिला है। शहरवासियों का कहना है कि सरकार व प्रशासन विकास का जितना भी दम भरे, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। अब तो थक-हारकर शिकायत करना भी छोड़ दी।
सिविल लाइन पर स्कूल, धर्मशाला, अस्पताल, बैंक, दो रेस्टोरेंट हैं, दर्जनों दुकानें, एक मॉल, बिजली शिकायत केंद्र, चार मंदिर, एक चर्च आदि है। इसके अलावा सिविल लाइन शहर की मुख्य सड़क है, जिस पर 24 घंटे लोगों का आवागमन रहता है, लेकिन बारिश में सिविल लाइन सड़क तालाब में तबदील हो जाती है। क्षेत्र में गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था लचर है। वैसे तो करीब 40 साल पहले सड़क के दोनों ओर नालियां बनाई गई थी। तब पानी खाली प्लाटों और पुलिया से होकर पास में बनाए गए जोहड़ में चला जाता था। वर्षों बीत जाने के बाद भी सड़क के दोनों ओर बनी नालियों को चौड़ा व गहरा करने की आज तक किसी ने जहमत नहीं उठाई। इसके अलावा सेंट थॉमस स्कूल के पास से गुजर रहे नाले की गहराई व चौड़ाई कम कर देने की वजह से बारिश के दिनों में नाले का पानी ओवरफ्लो होकर बैक मारता है, यही वजह है कि सिविल लाइन की ओर ढलान होने के कारण कई फीट पानी का जमाव हो जाता है।
नगर परिषद जगाधरी के पूर्व प्रधान अशोक शर्मा का कहना है कि क्षेत्र में आबादी तो बढ़ी है। पानी के बहाव पर लोगों द्वारा निर्माण कर लेने के कारण स्थिति में बदलाव आया है। पहले पानी तालाब में चला जाता था, जिससे पानी का जमाव नहीं होता था। पंजाबी सभा के वाइस प्रेसिडेंट अमित पाल रिंपी का कहना है कि प्रशासन ने नालियों को चौड़ा करने की कोई पहल नहीं की है। लोगों ने नालियों के ऊपर से रास्ता बनाया है। इस कारण पानी निकासी अवरूध हो रही है। क्वालिटी रेस्टोरेंट के संचालक श्याम मकोल का कहना है कि बरसात में राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार तो बरसात व नालियों का गंदा पानी रेस्टोरेंट के अंदर तक घुस जाता है। हालांकि उन्होंने अपने रेस्टोरेंट को सड़क से कई फीट ऊपर उठाया है, फिर भी स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं है। व्यापार सेल के जिला प्रधान राजेंद्र बजाज का कहना है कि शहर के अधिकतर लोग अपने घर व दुकानों पर जाने के लिए इसी सड़क का प्रयोग करते हैं। प्रमोद कुमार का कहना है कि बारिश के दिनों में रोजमर्रा मंदिर व चर्च में आने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

दावे मोटे काम छोटा
सरकार जिसकी भी रही हो, लेकिन विकास के दावे तो सभी ने किए हैं, लेकिन जनता को कितना फायदा हुआ यह किसी ने नहीं पूछा। अगर सड़कें बनाने से पहले पानी निकासी को ध्यान में रखकर नालों को चौड़ा व गहरा बना देते तो शायद लोगों को 30 साल पहले ही इस समस्या से मुक्ति मिल जाती, लेकिन अब खर्च के साथ-साथ मर्ज भी बढ़ता जा रहा है।

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