मैडल फैक्टरियों को नोटिस से हंगामा

Yamuna Nagar Updated Wed, 19 Sep 2012 12:00 PM IST
जगाधरी। रिहायशी क्षेत्र में धुुआं उगल रही मैटल की आठ फैक्टरियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोटिस जारी किए हैं। 15 दिन के अंदर फैक्टरी संचालकों ने प्रदूषण की मात्रा को कम नहीं किया, तो उनको सील कर दिया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद आठ फैक्टरी संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सांस के जरिए जहरीली गैस शरीर में जाने की वजह से मौत तक हो सकती है। इसके अलावा ब्रेन और किडनी भी फेल हो सकती है। सांस संबंधी भयंकर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
ट्विन सिटी में मैटल की 300 से ज्यादा छोटी बड़ी इकाइयां है। इनमें स्टील, पीतल, तांबे के बर्तन बनाने का काम किया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फैक्टरी संचालकों को हिदायत दी है कि वे प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भट्टी और चिमनी के बीच में एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (एपीसीडी) लगाए, ताकि जहरीली गैस को ट्रीट करने के बाद ही हवा में छोड़ा जा सके।

जांच के दौरान प्रदूषण फैलाती मिली इकाइयां
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक पिछले दिनों बोर्ड की एक टीम ने दुर्गा गार्डन, बुडिया रोड और शहर में स्थित मैटल की फैक्टरियों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान मैटल की आठ फैक्टरियां प्रदूषण फैलाती मिलीं। बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो फैक्टरियों की भट्टियों से निकलने वाला धुआं सीधा हवा में छोड़ा जा रहा था, जो कि आसपास के लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। बोर्ड के अधिकारियों ने इसकी सूचना आला अधिकारियों को दी और प्रदूषण फैला रही फैक्टरियों को नोटिस जारी कर उनको 15 दिन के अंदर स्थिति को नियंत्रित करने के आदेश जारी किए हैं। नोटिस में कहा गया है कि 15 दिन में फैक्टरी संचालकों ने प्रदूषण की मात्रा को कम नहीं किया, तो उनको सील कर दिया जाएगा।
फैक्टरी संचालकों में मचा हड़कंप
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आठ फैक्टरियों को नोटिस जारी किए जाने के बाद फैक्टरी संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। एक फैक्टरी के संचालक का कहना है कि एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस लगवाने में कम से कम एक लाख रुपये खर्च आता है। साल-दर-साल महंगाई बढ़ने की वजह से मुनाफा कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जगाधरी में लोगों द्वारा घरों में छोटी-छोटी औद्योगिक इकाइयां चलाई जा रही हैं। ऐसे में लोग एक लाख रुपये का डिवाइस लगवाने में असमर्थ हैं, हालांकि पिछले दिनों बोर्ड अधिकारियों से संयुक्त रूप से डिवाइस लगाने की मांग की गई थी, लेकिन वह मामला अधर में ही लटक गया। ऐसे में फिर से फैक्टरी संचालकों पर तलवार लटकती नजर आ रही है।
जहरीली गैस से स्वास्थ्य पर पड़ रहा विपरीत असर
मैटल की फैक्टरियों से जो जहरीली गैस निकल रही हैं, उनसे कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैस शामिल हैं। यह लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रही है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. वीपी मान का कहना है कि अगर उपरोक्त गैस ज्यादा मात्रा में मानव के शरीर में चली जाए तो उनकी मौत तक हो सकती है। इसके अलावा किडनी और ब्रेन डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग लंबे समय तक इन गैस के संपर्क में रहते हैं, उनको सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।

जांच के दौरान जिन फैक्टरियों में से जहरीला धुआं निकलता मिलेगा, उनको प्रदूषण बोर्ड की तरफ से नोटिस जारी किए गए हैं। फैक्टरी संचालकों को आदेश हैं कि वे 15 दिन में प्रदूषण के स्तर को कम करें, अन्यथा फैक्टरी को सील कर दिया जाएगा। जो भी फैक्टरी संचालक बोर्ड के नॉर्म्स पूरे नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-शैलेंद्र अरोड़ा, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यमुनानगर।

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