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अवैध माइनिंग और ओवरलोड के खिलाफ डंके की चोट पर होगी आर पार की लड़ाई

Rohtak Bureau Updated Thu, 13 Sep 2018 01:09 AM IST
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अवैध माइनिंग और ओवरलोड के खिलाफ डंके की चोट पर होगी आर पार की लड़ाई
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महापंचायत का ऐलान-
-अवैध माइनिंग और ओवरलोड के खिलाफ डंके की चोट पर होगी आर पार की लड़ाई
-लोगों की आवाज बना अमर उजाला, निष्पक्ष कवरेज की किसानों ने की सराहना-अवैध खनन से भूमिहीन हुए किसानों ने महापंचायत में दुखड़ा रोया
अमर उजाला ब्यूूरो
रादौर।
यमुना में हो रहे अवैध खनन को लेकर रादौर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव के सैंकड़ों लोगों ने गुमथला की अनाज मंडी में आयोजित महापंचायत में खुलकर अपना दुखड़ा रोया। लोगों ने सरकार व प्रशासन की कडे शब्दों में निंदा की। एडवोकेट वरयाम सिंह व पूर्व जिला परिषद सदस्य शिव कुमार संधाला की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने जमना मैया की जय जयकार करते हुए सरकार व प्रशासन को चेतावनी दी। लोगों के निशाने पर ठेकेदार, माइनिंग माफिया और वो तमाम अधिकारी भी रहे, जिन्होंने अवैध खनन में अपनी जेब गरम की। महापंचायत में किसान, मजदूर विकास संघर्ष समिति का गठन कर नौ बिंदुओं पर सर्व सम्मति से सहमति जताई।
एडवोकेट वरयाम सिंह ने बताया कि गांव संधाला मौजा नगला रांगडान का रेत ठेका जनहित को देखते हुए खारिज किया जाए। नगली, गुमथला, जठलाना, मॉडल टाउन करहेडा, पौबारी, रेत के घाटों पर खुदाई से पहले खनन अधिकारी द्वारा लेवल नहीं किया गया है। अधिकारियों ने ड्यूटी में कोताही बरतते हुए बिना पैमाइश के रेत खनन करवाया है। इसलिए अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएं। माइनिंग माफिया के खिलाफ आमजन की आवाज उठाने के लिए किसानों ने अमर उजाला की लगातार कवरेज की सराहना भी की।
महापंचायत में लिए गए फैसले
-किसी भी सूरत में अवैध तरीके से रेत का कारोबार नहीं होने देंगे।
-कोई किसान अपनी जमीन खनन और रास्ते के लिए नहीं देगा।
-अगर कोई ऐसा करता है तो पहले उसे समझाया जाएगा। न मानने पर 500 किसान दरी बिछाकर उसके घर के बाहर धरना देंगे और सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
-खनन माफिया का साथ देने वालों का मुंह काला किया जाएगा। इसमें कोई अधिकारी भी पकड़ा गया तो उसे खिलाफ भी यही सलूक होगा।
- पुलिस के पैरलल 11 क्विक रिस्पांस टीम करेगी निगरानी।
-ओवरलोड वाहनों को रोकने के लिए हर गांव के एंट्री व एग्जिट प्वाइंट पर चेक पोस्ट बनाए जाएंगे।
-घरेलू कार्य के लिए इस्तेमाल के लिए ग्रामीण रायल्टी नहीं देंगे।
-ग्रामीण नया कोई घाट चालू नहीं होने देंगे।
-90 फीसदी स्थानीय युवाओं को रोजगार देना सुनिश्चित किया जाएगा।
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सरकार से यह मांग
-जिन किसानों की भूमि अवैध खनन के कारण यमुना नदी में समा गई है, उन किसानों को सरकार मुआवजा दे।
- भूमि के मालिक व सरकार मिलकर सर्वमान्य नीति बनाएं। जिससे दोनों का लाभ हो और बिचौलियों को बाहर किया जाए।
-प्रभावित किसानों का कर्ज व बिजली का बिल माफ किया जाए।
-माफिया द्वारा रास्तों पर लगाए गए अवैध चेक पोस्ट हटाए जाएं।
- ठेकेदारों को भूमि का कमर्शियल इस्तेमाल करने से रोका जाए।
- अवैध खनन के कारण टूटे तटबंध बनाए जाएं
-यूपी व हरियाणा को जोड़ने के लिए नदी पर पुल बनाया जाए।
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खनन व सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
महापंचायत में खनन विभाग और सिंचाई विभाग के अफसरों पर माफिया से मिलीभगत के आरोप लगाए गए। एडवोकेट वरयाम सिंह ने हवा में लहराकर सरकारी कागजात के प्रूफ लोगों को दिखाए और कहा कि यह सब मिले हैं। इसलिए हमारी आवाज नहीं सुनी जा रही है। लोगों ने संबंधित विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों को सस्पेंड करने की मांग की।
इसलिए आई महापंचायत की नौबत
-यमुना में जोरदार तरीके से अवैध खनन किया गया।
-ठेकेदारों ने तीन मीटर की बजाय 30 मीटर गहराई तक यमुना खोद दी।
-किनारे तक को नहीं बख्शा और बांध बनाकर पानी का बहाव बदल दिया।
-विरोध करने पर किसानों से मारपीट की और उन पर झूठे केस दर्ज करवाए
-ओवरलोड ट्रकों ने सड़कों को तोड़ दिया, हादसों में युवाओं की जान जाने लगी।
-बरसात में भूमि कटाव हुआ और 200 एकड़ कृषि योग्य भूमि यमुना में समा गई।
- बाढ़ के प्रभावित किसानों को कोई मुआवजा नहीं दिया जाता।
- किसानों की जमीन नदी में से बहती है, लेकिन रायल्टी का एक पैसा नहीं मिलता। अगर वह अपनी घरेलू जरूरत के लिए खनन सामग्री उठाते हैं तो ठेकेदार उनसे रॉयल्टी लेते हैं।
-अवैध खनन के खिलाफ पुलिस, खनन, सिंचाई और अन्य विभागों ने ग्रामीणों की शिकायत पर एक्शन नहीं लिया। इसलिए किसानों ने अपनी लड़ाई लड़ने का फैसला लिया।
-स्थानीय युवाओं को रोजगार के प्रावधान की बजाय बड़ी मशीनों से खुदाई की गई।
-एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई गई।
-यमुना हमारी मां है और हम इसका सीना छलनी नहीं होने देंगे। खनन व सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जितना कमाना था कमा लिया। अब अवैध खनन की बात तो छोड़िए, हम ठेकेदार को भी नियम कायदे नहीं तोड़ने देंगे। हमने निगरानी समिति बना दी है। हर घाट की निगरानी होगी और गांव के एंट्री एग्जिट प्वाइंट पर किसान चेक पोस्ट बनाई जाएगी।
-वरयाम सिंह, हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता
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भूमिहीन हुए किसानों ने रोया दुखड़ा
-जठलाना निवासी विनोद गोयल ने कहा कि 1992 में उनके पास 20 एकड़ भूमि थी। लेकिन बाढ़ आने पर उनकी 17 एकड़ भूमि यमुना में समा चुकी है।
-अशोक बतरा ने कहा कि उनके पास दस एकड भूमि अपनी थी और दस एकड़ ठेके पर ली हुई थी। सारी बीस एकड़ भूमि यमुना में समा चुकी है।
-उदयपाल के पास 11 एकड़ भूमि थी। जिसमें से नौ एकड भूमि यमुना में हमेशा के लिए समा चुकी है। अब उसके पास मात्र दो एकड भूमि बची है।
-कलीराम की 14 एकड़ भूमि थी। अब उसके पास कोई भूमि नहीं है। सारी भूमि यमुना नदी में समाकर रेत के टीलों में बदल चुकी है।
-रमेश कुमार ने बताया कि उसकी पांच एकड़ भूमि यमुनानदी में समा चुकी है। अब उसके पास खेती के लिए कोई भूमि नहीं है।
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कागजों में जमीन के मालिक, लेकिन कर रहे हैं मजदूरी
महापंचायत में आई महिलाओं ने कहा कि प्रशासन की अनदेखी के कारण जमीन होते हुए भी हम गरीबी का जीवन जी रहे है। कागजों में उनके पास भूमि तो है, लेकिन खेती के लिए नहीं बल्कि यहां यमुना बह रही है। इस बार खनन माफिया ने करोड़ों कमाएं, लेकिन हमारे घर पर चूल्हा भी नहीं जल रहा। परिवार के लोग मजदूरी करके अपना गुजर बसर करने को मजबूर हैं।
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राजनीतिक दलों के नेताओं ने किया समर्थन -
काफी संख्या में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी महापंचायत में पहुंचे। कांग्रेस सचिव भूपेन्द्र राणा ने कहा कि प्रभावित ग्रामीणों के संघर्ष में कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से उनके साथ है। कांग्रेस नेता मांगेराम ने कहा कि प्रभावित गांव के लोगों के संघर्ष में उनकी पार्टी पूरी तरह से उनके साथ है। लोगों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। वहीं भाकियू के प्रधान संजू गुनियाना भी पहुंचे।
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बारिश में भी डटे रहे किसान
महापंचायत के दौरान तेज आंधी के साथ बारिश भी आ गई। गुमथला अनाज मंडी के शेड के नीचे बैठे लोग डटे रहे और भीगते रहे। करीब एक घंटे तक बारिश होती रही। बारिश के बाद किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल खनन जोन में भी पहुंचा और वहां का जायजा लिया। बारिश की वजह से वहां खनन तो नहीं हो रहा था, लेकिन माइनिंग की वजह से भूमि का काफी बड़ी मात्रा में कटाव जरूर पाया गया।
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-ये रहे मौजूद
वरयाम सिंह, शिवकुमार संधाला, मनोज, विनोद बतरा, कुलदीप सिंह, नरेश कुमार, अमरजीत, रामकुमार, जितेन्द्र मेहता, नंदलाल, सर्वजीत सिंह, गुरेदव सिंह, सतनाम सिंह, सोनू, रमेश, श्याम, अमरजीत, विनोद, अमरजीत, अमीलाल, राजेश, अशोक, कर्मवीर, अनिल, धर्मपाल, पवन कांबोज, रामकुमार वाल्मीकि, सुरेन्द्र कुमार, निरंजन, मनजीत सिंह, बलविन्द्र सिंह व राजकुमार समेत सैकड़ों की संख्या में किसान मौजूद रहे।बॉक्स
ये 25 गांव जन आंदोलन में शामिल
-गुमथला, राव, संधाला, संधाली, लालछप्पर, मॉडल टाउन, बरेड़ी, उन्हेडी, जठलाना, मंधार, राझेडी, चोगवा, खुखनी, हंसु माजरा, चंद्राव, बुर्ज, खर्क, गढ़ी बीरबल, कलरी, टाबर, नसुलगढ, रसूलगढ़, पालेवाले, मारुपुर, मधुबांस।
कोट्स
-अवैध खनन और ओवरलोड के खिलाफ मीडिया का काफी साथ मिला है। खासकर अमर उजाला की लगातार कवरेज से किसान और आमजन को जागरूक करने में साथ मिला। जो जनआंदोलन को शुरू करने में बड़ा मददगार साबित हुआ है। हम क्षेत्रवासियों को विश्वास दिलाते हैं कि उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेंगे और इमानदारी के साथ अपने क्षेत्र के अस्तित्व को बनाने में योगदान देंगे।
-एडवोकेट वरयाम सिंह, हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता
फोटो

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