एंकर...जंगली जानवरों के लिए कलेसर जंगल में तैयार होगी बरसीन और बाजरा

Rohtak Bureau Updated Fri, 09 Feb 2018 11:13 PM IST
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जंगली जानवरों के लिए कलेसर के जंगल में तैयार होगी बरसीम और बाजरा
-जंगल में खेती से बचेंगे किसानों के खेत और जंगली जानवर
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद। कलेसर नेशनल पार्क के जंगली जानवर अब किसानों के खेत बर्बाद नहीं करेंगे। भूख लगने पर खेतों को रुख करने वाले जंगली जानवरों के लिए अब जंगल में ही बरसीम और बाजरा उगाई जा रही है। इसके लिए जंगल में बाकायदा खेत तैयार किए जा रहे हैं।
गर्मी का सीजन आते ही जंगली जानवर घास और पानी की तलाश में मैदानी इलाकों का रुख करने लगते हैं। इससे जंगल के आसपास खेती करने वाले जमींदारों को खासा नुकसान झेलना पड़ता है। भूखे जंगली जानवर खेतों में लगी फसल को बर्बाद कर देते हैं। खेत को जंगली जानवरों से बचाने के लिए किसानों को रातों को जागकर रखवाली करनी पड़ती है। जंगल से लगे खेतों के किसान हर साल वन विभाग से जंगली जानवरों से उनकी फसल बचाने की गुहार लगाते रहते हैं। इस बारे में वन विभाग ने किसानों की फसलों को बचाने के लिए कदम उठाया है। इसके तहत जंगल में खेत तैयार कर उसमें बरसीम व बाजरा उगाया जा रहा है। जंगली जानवर इसे बडे़ चाव से खाते हैं। इसके मद्देनजर जंगल में बनी फायर लाइनों में लगभग 30 एकड़ एरिया में घास में बाजरे आदि की बिजाई की गई है ताकि जंगली जानवर जंगल में रहकर ही अपना खानपान कर सकें और मैदानी इलाकों की ओर ना जा सकें। बरसीम और बाजरा अगले दो महीने में तैयार हो जाएगी। जंगल में खरगोश, जंगली सूअर, हिरन, चीतल, सांभर और नील गाय काफी संख्या में हैं। ये बरसीम और बाजरा बड़े चाव से खाते हैं।

फसल को बचाने के फेर में जाती है जानवरों की जान
जंगली जानवर हर साल जंगल से खेतों में लगी फसल को खाने आते हैं। जानवर रात के समय खेतों में आते हैं। सभी किसान रात के समय अपने खेतों की रखवाली नहीं कर पाते। इस कारण जमींदार अपनी फसलों को बचाने के लिए अपने खेतों में कंटीली तार लगाते हैं। वहीं, कुछ जमींदार तो रात के समय कंटीली तारों में करंट छोड़ देते हैं। तार के संपर्क में आते ही जंगली जानवर अपनी जान गंवा देते हैं। वन विभाग को एक तरफ जहां किसानों की फसल बचानी होती है। वहीं, जंगली जानवरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी वन विभाग पर है। ऐसे में वन विभाग ने जंगल में ही जंगली जानवरों के लिए हरा चारा उपलब्ध कराने का फैसला लिया।

वर्ष 2014 के बाद से खेतों में नुकसान की घटनाएं बढ़ीं
वर्ष 2011 में कलेसर नेशनल पार्क में जंगली जानवरों के लिए जंगल में बनी फायर लाइनों में खेतों की तरह फसल उगाई गई थी। उस समय भी जंगली जानवरों द्वारा खेतों में जमींदारों की फसल के नुकसान की घटनाओं में भी कमी आई थी। वर्ष 2014 के बाद जंगली जानवरों द्वारा जंगल के पास लगते खेतों में फसल को नुकसान करने की घटनाएं बढ़ी हैं। इन्हीं घटनाओं के चलते वन विभाग ने एक बार फिर जंगल की फायर लाइनों में घास उगाने की तैयारी कर ली है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जंगली जानवर हरे चारे की तलाश में जंगल से निकलकर खेतों में आते हैं। यदि जानवरों को जंगल में ही हरा चारा मिल जाएगा तो वे खेतों का रुख नहीं करेंगे। इससे किसानों के खेतों में नुकसान की घटनाएं नहीं होंगी और जंगली जानवर भी सुरक्षित रह सकेंगे।

जंगली जानवरों की सुरक्षा और उनके खानपान को ध्यान में रखते हुए जंगल में बनी फायर लाइनों में बरसीम व बाजरे आदि की बिजाई की गई है ताकि जंगली जानवर जंगल में रहकर ही अपना खानपान कर सकें और मैदानी इलाकों की ओर ना आए।
- राजपाल, निरीक्षक, वन्य प्राणी विभाग
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