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Rohtak News: पीजीआई में वार्ड के मरीजों को दी जाने लगी छुट्टी, 10 से 15 दिन बाद बुलाया

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 25 Nov 2022 06:30 AM IST
जनता कालोनी से ओपीडी में दिखाने पहुंची विमला। अमर उजाला
जनता कालोनी से ओपीडी में दिखाने पहुंची विमला। अमर उजाला
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रोहतक। बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में हड़ताल के चलते पीजीआई के वार्डों में भर्ती मरीजों को छुट्टी दी जाने लगी है। वीरवार को अनेक मरीजों को घर भेज दिया गया। इन्हें दस से 15 दिन बाद दोबारा जांच के लिए बुलाया गया है। इसके चलते वार्डों में बेड खाली होने लगे हैं। मरीजों को राहत के लिए आपातकालीन विभाग व ट्रॉमा सेंटर सुचारु रूप से काम कर रहा है।

उधर, सिविल अस्पताल में व्यवस्था सुचारु रही। हड़ताल के कारण मरीजों को हो रही परेशानी या उनके लिए की गई वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर पीजीआई प्रशासन ने कुछ भी कहने से परहेज किया है। यही नहीं, विद्यार्थियों के साथ मीडिया कर्मचारियों का संस्थान में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। पीजीआई की स्वास्थ्य सेवाएं आरडीए के हड़ताल पर जाते ही चरमराने लगी हैं। फिलहाल संस्थान में गंभीर मरीज ही उपचाराधीन हैं। इन्हें भी एक-दो दिन में हालात काबू में नहीं आने पर घर भेजा जा सकता है।

हर दिन 150 ऑपरेशन का बढ़ेगा वर्कलोड
पीजीआई में शुक्रवार से ओपीडी व इलेक्टिव सर्जरी में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। इससे ऑपरेशन की जरूरत वाले 150 मरीजों का वर्कलोड रोजाना बढ़ेगा। ऑपरेशन थियेटर में मरीजों की सूची लंबी होगी। इससे कैंसर व अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
रोजाना होते हैं 50 ऑपरेशन
पीजीआई में रोजाना औसतन 50 गंभीर मरीजों के ऑपरेशन होते हैं। इसके अलावा, नेत्र विभाग, सर्जरी, न्यूरो, यूरोलॉजी, बर्न एंड प्लास्टिक, ईएनटी व अन्य विभागों के भी करीब 100 तय किए गए ऑपरेशन होते हैं। ऐसे ऑपरेशनों की सूची आने वाले दिनों में संघर्ष लंबा चलने पर बढ़ती जाएगी। इससे मरीजों को राहत भी देर से मिलती नजर आ रही है। इसके अलावा करीब 50 प्रसूति भी होती हैं।
सुचारु रही सिविल अस्पताल की ओपीडी
सिविल अस्पताल की ओपीडी सुचारु रूप से चली। यहां वीरवार को 1490 मरीज ही इलाज के लिए पहुंचे। बुधवार को यहां 1560 मरीज आए थे। अस्पताल में औसतन 15 सौ से 16 सौ मरीज रोजाना आते हैं। पीजीआई की हड़ताल का वीरवार को खास असर नजर नहीं आया।
मरीजों के कोट्स-
अब मैं कहां कटवाऊं पैर
मेरे पिता बलराज सिंह के पैर में इंफेक्शन हो गया। इलाज के लिए खानपुर मेडिकल कॉलेज गए। यहां घुटने से नीचे का पैर काट दिया। अब दोबारा इंफेक्शन हो गया है। पैर और काटना पड़ेगा। खानपुर से हमें 20 नंबर को पीजीआई भेज दिया। यहां भी राहत नहीं मिली है। वीरवार को दोपहर बाद भी बेड तक नहीं मिला। ओपीडी से डॉक्टर ने इमरजेंसी में भेज दिया। अब कहां जाऊं, कहां पैर कटवाऊं।
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- कुलदीप, कटवाल।
सांस में तकलीफ है। कुछ दिनों से परेशानी बढ़ गई तो इलाज के लिए पीजीआई आई। यहां ओपीड़ी में डॉक्टर ही नहीं मिला। हड़ताल की बात कह कर बाद में आने को कहा गया है। हड़ताल कब खत्म होगी पता नहीं। मेरा तो घर जाना मुश्किल हो गया है। दवाई भी नहीं मिली। पता नहीं क्या होगा।
- विमला, जनता कॉलोनी।
पीजीआई के वार्ड 12 में आठ दिन पहले भर्ती हुआ था। मेरा दायां पैर काटा है। ऑपरेशन हो गया है। मुझे 15 दिन बाद फिर बुलाया गया है। उसी दिन डॉक्टर घाव देखने के साथ टांके खोलेगा। तब तक घर रह कर ही दवा पट्टी करनी है।
- बलजीत, मोठ लुहारी।
पीजीआई के वार्ड 12 में 10 दिन पहले भर्ती हुआ था। मेरे घुटने में तकलीफ थी। इसलिए डॉक्टर ने ऑपरेशन किया है। अब अस्पताल से छुट्टी कर घर जाने को कहा है। कोई दिक्कत हो तो 10 दिन बाद फिर दिखाने के लिए कहा है। इसलिए अब घर जा रहे हैं।
- प्रदीप कुमार झज्जर।
मेरे बेटे मनोज को सात दिन पहले पीजीआई के वार्ड 6 में भर्ती किया गया था। इसका छह दिन पहले ही नले का ऑपरेशन हुआ है। कल ही दोबारा टांके लगाए हैं। अब छुट्टी कर घर भेज रहे हैं। घर पर ही इसकी मरहम पट्टी करनी है। इसलिए इसे लेकर जा रही हूं। हमें 10 दिन बाद आने को कहा है।
- मूर्ति देवी, लुहारी जाटू, भिवानी।
किसानों, शिक्षकों व सेवानिवृत्त कर्मचारियों का मिला समर्थन
एमबीबीएस विद्यार्थियों को उनके संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वालों की संख्या बढ़ने लगी है। इसी कड़ी में वीरवार को किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष रवि आजाद धरना स्थल पर पहुंचे। इन्होंने विद्यार्थियों को अपना समर्थन दिया। इसके अलावा रिटायर्ड कर्मचारी संघ के प्रेस सचिव जगपाल सांगवान ने कहा कि संगठन बॉन्ड पॉलिसी के खिलाफ है। आंदोलनकारी विद्यार्थियों का समर्थन करता है।
इधर, हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ की महत्वपूर्ण बैठक मेडिकल मोड़ पार्क में हुई। इसकी अध्यक्षता जिला प्रधान जगदीश चहल ने की। राज्य प्रधान डॉ. दिनेश निंबड़िया व रामकुमार रंगा ने कहा कि बॉन्ड पॉलिसी वापस ली जाए। इस मौके पर देवेंद्र कटारिया, डॉ. हरी निवास भट्ठी, ऋषि पाल रंगा, जय भगवान, कुलदीप सिंह, अशोक कुमार, वीरेंद्र रंगा, फूल कुमार, पुनीत चहल, जगदीश कुमार हरी निवास, सुरेंद्र कुमार, विजेंद्र कुमार, वीरभान सिंह, तरुण कुमार, सुनीता चहल मौजूद रही।
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