पीजीआई में हंगामा बरकरार, फिजियोथैरेपी विद्यार्थियों के बाद अब नर्सें सड़क पर

ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 17 Feb 2017 01:51 AM IST
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दोपहर एक बजे स्टाफ नर्सों ने कुलपति कार्यालय के बाहर शुरू किया प्रदर्शन, वीसी के खिलाफ नारेबाजी - फोटो : amar ujala
पीजीआई के कुलपति कार्यालय के बाहर वीरवार को भी हंगामा जारी रहा। फिजियोथैरेपी विद्यार्थियों के विरोध के बाद स्टाफ नर्सों ने भी कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। स्टाफ नर्सें पहले तो बीच सड़क पर बैठ गईं, इसके बाद डायरेक्टर की गाड़ी को भी घेर लिया। वहीं लगातार नारेबाजी और स्टाफ नर्सों के विरोध को देखते हुए कुलपति ने मांग को मानने का आश्वासन दिया। केवल आश्वासन देने पर नर्सें उग्र हो गईं और 18 को सामूहिक अवकाश पर जाने का पत्र सौंप दिया। नर्सिंग एसोसिएशन का कहना था कि शुक्रवार एक बजे तक अगर केंद्र के समान ग्रेड पे सहित अन्य मांगों को पूरा नहीं किया तो विजय पार्क में आंदोलन की तैयारी होगी।
12 फरवरी से काले बिल्ले लगाकर पीजीआई प्रशासन का विरोध कर रहीं स्टाफ नर्सें वीरवार को सड़क पर उतर आईं। करीब एक बजे स्टाफ नर्सें एमएस कार्यालय पहुंची और हंगामा काटा। इसके बाद निदेशक कार्यालय पहुंचकर करीब डेढ़ घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। जब यहां भी बात नहीं बनी तो कुलपति कार्यालय के पास बीच सड़क पर बैठ गईं और जाम लगा दिया। स्टाफ नर्सों ने चेतावनी दी कि यदि पीजीआई की नर्सों ने हड़ताल कर दी तो व्यवस्था बिगड़ जाएगी।


18 को सामूहिक अवकाश, 19 को एक शिफ्ट में ड्यूटी

वहीं देर शाम कुलपति कार्यालय की ओर से नर्सिंग एसोसिएशन को बताया गया कि मांगों को पूरा करने के लिए सरकार के पास भेज दिया गया है। इस पर बाहर खड़ी स्टाफ नर्सों ने मानने से इंकार कर दिया। नर्सों का कहना था कि जो मांग कुलपति अपने स्तर से पूरी कर सकते हैं उसे सरकार के पास भेजने की बात कही जा रही है। आश्वासन मिलने के बाद नर्सों ने करीब शाम छह बजे कुलपति कार्यालय में जाकर सामूहिक अवकाश का पत्र सौंप दिया। इस मौके पर जरनल सेक्रेटरी सज्जन यादव, चंद्रकांता, विनोद, स्वर्णलता, विनोद पंघाल, अनीता दहिया, सुमन लता और कांता मान सहित कई नर्सें मौजूद रही।

 नर्सिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से की बातचीत

कुलपति और निदेशक ने नर्सिंग स्टाफ के एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए कार्यालय में बुलाया। उन्होंने बताया कि 14 फरवरी को ही उनकी मांगों का ज्ञापन चंडीगढ़ भेज दिया गया है। लेकिन प्रतिनिधिमंडल ने इस बात को मानने से इंकार कर दिया और जल्द से जल्द मांग पूरी करने को कहा।

फिजियोथैरेपी विद्यार्थियों का भी इंकार

बुधवार को फिजियोथैरेपी विद्यार्थियों की मांग पर संस्थान ने कॉलेज में शौचालय बनवाने की मांग मान ली। हालांकि इंटर्न विद्यार्थियों के स्टाइपेंड पर आश्वासन दिया गया। ऐसे में वीरवार को फिजियोथैरेपी विद्यार्थी ने विरोध जारी रखा और पीजीआई प्रशासन पर आरोप लगाया कि झूठा आश्वासन देकर हड़ताल खत्म करवाना चाहते हैं। जबकि उनकी मांग को कुलपति तुरंत पूरी कर सकते हैं। प्रशासन उन्हें तीन महीने का समय ही दे रहा है। यदि मांग पूरी नहीं हुई तो वे भूख हड़ताल शुरू कर देंगे। ऐसे में फिजियोथैरेपी विद्यार्थी कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर डटे हैं।
 

विद्यार्थी बोले, दबाव बहुत, झुकेंगे नहीं

विद्यार्थियों ने बताया कि उनका धरना खत्म कराने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। कभी उन्हें फेल करने की तो कभी लेक्चर शार्ट करने की धमकी दी जा रही है। लेकिन वे मानने वाले नहीं हैं। जब तक उनकी स्टाइपेंड की मांग पूरी नहीं होती वे आंदोलन नहीं छोडे़ंगे। गौरतलब है कि विद्यार्थियों के आंदोलन को समर्थन करने एमडीयू से छात्र संगठन भी पहुंचे, लेकिन वर्तमान की स्थिति को देखते हुए इस पर सहमति नहीं बन पाई। चार वर्षीय कोर्स में 150 विद्यार्थी हैं, सभी का कहना है कि स्टाइपेंड की मांग उनकी पूरी होनी ही चाहिए।

नर्सिंग स्टूडेंट ने चलाया काम

स्टाफ नर्स के हड़ताल पर जाने से वार्डों में कुछ देर के लिए कार्य प्रभावित रहा। अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लेते हुए नर्सिंग कालेज की विद्यार्थियों की मरीजों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंप दी। सूत्रों की मानें तो नर्सिंग कालेज का कुछ स्टाफ इसका पिछले काफी समय से विरोध भी करता आ रहा है कि उनके विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। यदि संस्थान की नर्सें हड़ताल पर जाती है तो अधिकारी इन छात्राओं को विकल्प के रूप में प्रयोग कर सकता है।

बोले पदाधिकारी

स्टाफ नर्स की 10 साल से मांग पेंडिंग है, लेकिन अधिकारियों ने उनकी फाइल तक सरकार के पास नहीं भेजी। उनकी मांग है कि दिल्ली एम्स, चंडीगढ़ पीजीआई की स्टाफ नर्सों के समान वेतन, नर्सिंग अलाउंस और पदों का नाम नर्सिंग अफसर हो। पीजीआई  निदेशक ने उनको जवाब दिया है कि उनके हाथ में मांगों को पूरा करना नहीं है। इस संबंध में एग्जिक्यूटिव काउंसिल की बैठक में कुलपति ही कुछ कर सकते हैं। कुलपति कार्यालय में भी जब सही जवाब नहीं मिला तो अब नर्सें 18 फरवरी को सामूहिक अवकाश पर जाएंगी और 19 फरवरी से सुबह सात से दोपहर दो बजे तक एक शिफ्ट में ड्यूटी करेंगी। यदि प्रशासन चाहता है कि मामला न बिगडे़ तो अधिकारी एक कमेटी बना कर उनके साथ टीम को चंडीगढ़ भेजे, नहीं तो हड़ताल होना निश्चित है। सभी स्टाफ नर्स पहले दोपहर एक बजे तक अधिकारियों के निर्णय का इंतजार करेंगे और बाद में अगली कार्रवाई होगी।
- अशोक यादव, मेल स्टाफ नर्स, प्रेस सचिव, नर्सिंग एसोसिएशन, पीजीआईएमएस


ये हैं स्टाफ नर्सों की मुख्य मांगें

- नर्सों को नर्स ऑफिसर का नाम
- केंद्र के समान ग्रेड पे
- नर्सिंग अलाउंस
- यूनिफार्म अलाउंस व धुलाई भत्ता
- रिस्क, वाहन और अखबार भत्ता

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