सूबे के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में अब ग्लव्ज नहीं

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2021 01:46 AM IST
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सूबे के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस में अब ग्लव्ज भी उपलब्ध नहीं है। जबकि सामान्य उपचार के लिए ओपीडी से लेकर ऑपरेशन थियेटर व वार्डों में इसकी सबसे अधिक जरूरत होती है। कोरोना संक्रमणकाल में इसकी उपयोगिता सबसे अधिक है। इसके बावजूद संस्थान में ग्लव्ज की कमी लगातार बनी हुई है। इसका खामियाजा प्रतिदिन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, मजबूरी में हर दिन मरीज लाखों रुपये के ग्लव्ज खरीदने पर मजबूर हैं।
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पीजीआईएमएस ने कोरोना की दूसरी लहर समाप्त होने पर अपनी सभी सेवाओं को बहाल कर दिया है। इसके चलते संस्थान में पहले की तरह प्रतिदिन सात से आठ हजार मरीज ओपीडी में, दो हजार के करीब आपात विभाग में व 2200 के करीब मरीज वार्डों में उपचाराधीन होते हैं। इसके अलावा 150 से अधिक प्रतिदिन यहां ऑपरेशन होते हैं। यहां ओपीडी के अलावा सभी मरीजों को बाहर से ग्लव्ज खरीदने पड़ रहे हैं। एक ग्लव्ज की कीमत बाजार में लगभग 17 रुपये की है और एक मरीज को कई ग्लव्ज खरीदने पड़ते हैं। कोरोना संक्रमण से पहले संस्थान में ग्लव्ज उपलब्ध रहते थे, लेकिन अब समस्या आ रही है। गौरतलब है कि संस्थान में ग्लव्ज की क्वालिटी को लेकर पहले ही विवाद रहता था और अब ग्लव्ज ना होने से मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है।

एचएमएससीएल के भरोसे बैठा पीजीआईएमएस
एचएमएससीएल (हरियाणा मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड) के भरोसे पीजीआईएमएस ग्लव्ज की आपूर्ति के लिए बैठा है। यहीं से उपचार सामग्री संस्थान में आती है, लेकिन यह व्यवस्था सुचारु रूप से नहीं चल रही है। दूसरे विकल्प में संस्थान का रेट कांट्रेक्ट होता है। इसके तहत आपात स्थिति में स्थानीय स्तर पर ग्लव्ज की खरीद की जा सकती है। इसके लिए विभागाध्यक्ष, एमएस व निदेशक के पास अतिरिक्त बजट भी होता है। लेकिन पीजीआईएमएस में रोजाना होने वाली खपत के समक्ष यह बजट नाकाफी रहता है।
निजी सप्लायरों की हो सकती है गेम
सूत्रों की मानें तो एचएमएससीएल व संस्थान को ग्लव्ज सप्लाई करने वाले निजी सप्लायर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहे हैं। अंदेशा है कि जो ग्लव्ज निजी सप्लायरों को सरकार को सात रुपये तक देना पड़ता है वह बाजार में 17 रुपये का बिक रहा है। यदि रेट कांट्रेक्ट पर भी ग्लव्ज देना पड़ता है तो इसकी कीमत 11 से 13 रुपये हो जाती है। ऐसे में मुनाफा सरकारी सप्लाई रुकने व ओपन बाजार में ग्लव्ज की उपलब्धता से है।
हमने हरियाणा मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड को डिमांड भेजी हुई है और रिमाइंडर भी भेजा हुआ है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी आरसी पर खरीद करने की अनुमति दी हुई है। जल्द ही ग्लव्ज की अनुपलब्धता जैसी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। - डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस

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