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दादा-दादी के हत्यारे को उम्र कैद की सजा

Updated Tue, 06 Jun 2017 01:34 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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झज्जर।
जमीन के लिए हुए झगड़े के केस में जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्ण कुमार की अदालत ने पोते को दोहरे हत्याकांड का दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। दादा-दादी की हत्या के मामले में यह फैसला 30 महीने के अल्प समय में आया। इस बीच सरकारी पक्ष ने 15 से अधिक गवाहों को वारदात के संबंध में अदालत के समक्ष समन कराया।
जानकारी के अनुसार 12 दिसंबर 2014 को माछरौली निवासी रामअवतार पुत्र शिवनारायण ने झज्जर थाना सदर पुलिस को शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पिता शिवनारायण और मां गिंदोड़ी की 11/12 दिसंबर की रात ईंट मारकर के हत्या कर दी। मामले में पुलिस जांच में सामने आया कि रामअवतार के तीन अन्य भाई थे। इनमें शिवअवतार, वेदप्रकाश गांव में रहते थे। जबकि उपदेश अलवर में अपना कामधंधा करता था।

इस बीच पुलिस ने हत्या के मामले में शिवनारायण के पौते विकास उर्फ विक्की को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला था कि परिवार के सदस्यों में पुश्तैनी जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद था और इसके लिए विकास ने बुजुर्गों की हत्या की थी।
केस में बचाव पक्ष के वकील की ओर से जहां इस मामले को ब्लाइंड मर्डर बताते हुए हत्याकांड में गवाह पर सवाल भी उठाए थे। हत्याकांड में गवाह के रूप में सतगुरु पुत्र रामअवतार रहे। बचाव पक्ष के वकील का कहना था कि सतगुरु ने अपने बयान में बताया है कि वह हत्यावाले समय मौके पर था। लेकिन उन्होंने इसके बारे में किसी को नहीं बताया और घर जाकर सो गया था। जबकि अगले ही दिन वह समूचा घटनाक्रम बता देता है।
सरकारी पक्ष की ओर से हत्या को रंजिशन बताया गया, जिसमें सतगुरु ना केवल घटनाक्रम का प्रत्यक्षदर्शी गवाह रहा, बल्कि उसने आरोपी की पहचान भी की। इस बीच यह भी पता चला कि आरोपी विकास दिल्ली के नजफगढ़ में किराए के मकान में रहता था और जमीन के बंटवारे के संबंध में दादा-दादी के पास सुरेहती रोड की नहर के समीप खेत में पहुंचा था, जहां वे दोनों सरसों के खेत में पानी लगा रहे थे। बात मानने से इनकारी के बाद हत्या कर दी गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्ण कुमार ने दोनों पक्षों की ओर से पेश किए गए गवाह व सबूतों के मद्देनजर विकास उर्फ विक्की को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा और 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है।

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