स्वाद ने फंसाई किन्नू से कमाई

Rohtak Updated Mon, 20 Jan 2014 05:53 AM IST
डबवाली (सिरसा)। गांव अबूबशहर में स्थापित प्रदेश के एकमात्र किन्नू प्लांट को दो साल बाद जुगाड़ से चालू किया गया है, लेकिन प्लांट में एक महत्वपूर्ण हिस्से में काम शुरू नहीं हो पाया है। इस वजह से यह पता नहीं लग पाएगा कि किन्नू मीठा है या खट्टा। अब किन्नू की ग्रेडिंग केवल उसके साइज के आधार पर ही हो पाएगी, जिससे उत्पादकों को उचित दाम मिलने में कठिनाई आएगी। इस प्लांट को पूरी तरह चालू करने में बजट अड़ंगा बन रहा है। यह प्लांट फ्रांसीसी तकनीक पर आधारित है और संबंधित कंपनी ने इसे चालू करने के लिए 60 लाख रुपये की मांग की है, जिस पर अधिकारी मंथन कर रहे हैं।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 2008 में केंद्र और राज्य सरकार ने अबूबशहर में 16 एकड़ जमीन पर यह प्लांट लगाया था। हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड पंचकूला के तहत साल 2008-10 तक करीब 1400 टन किन्नू की वैक्सिन और ग्रेडिंग की गई। इसके बाद मार्केटिंग बोर्ड ने इसे ठेके पर दे दिया। साल 2010-12 में ठेकेदार ने करीब 2000 टन किन्नू की ग्रेडिंग की। इस बीच मशीन खराब होने पर घाटे के डर से ठेकेदार काम छोड़कर भाग गया। इसके बाद यह प्लांट शुरू नहीं होे पाया।

फ्रांस की कंपनी ने प्लांट ठीक करने के लिए मांगे 60 लाख रुपये
मार्केटिंग बोर्ड के क्षेत्रीय प्रशासक सुरेश कुमार कस्वां ने बताया कि प्लांट के कंप्यूटराइज्ड हिस्से में आई खराबी को लेकर सरकार ने प्लांट स्थापित करने वाली फ्रांस की कंपनी से संपर्क साधा। उसने 60 लाख रुपये की मांग की। कंप्यूटराइज्ड भाग को बंद करके सरकार ने अबोहर (पंजाब) के एक मैकेनिक गुरजंट सिंह से संपर्क साधा। गुरजंट ने मात्र 10 दिनों के भीतर जुगाड़ करके प्लांट को रविवार को दोबारा चालू कर दिया। इसके लिए उसने दो लाख बीस हजार रुपये लिए हैं। अब फ्रांसीसी कंपनी को दोबारा बुलाया जाएगा।
ऑप्टिकल कैमरे से पता चलता है स्वाद का
प्लांट पर किन्नू को लाने के बाद उसकी वाशिंग, ब्रूशिंग, वैक्सिन, ग्रेडिंग और पैके जिंग का कार्य होता है। पूरी प्रक्रिया के दौरान किन्नू ऑप्टिकल कैमरे से भी गुजरता है। इससे पता चलता है कि कौन सा किन्नू मीठा है और कौन सा खट्टा। यही इस प्लांट की सबसे बड़ी ताकत है। अब प्लांट में केवल वैक्सिन होगी। अब ग्रेडिंग किन्नू के साइज से होगी। प्लांट में वैक्सिन और ग्रेडिंग करवाने पर किसान को एक किलोग्राम किन्नू के बदले एक रुपया देना होगा। हालांकि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसान दोनों चीजों में सब्सिडी प्राप्त कर सकेगा।
ग्र्रेडिंग के लिए पंजाब जाना मजबूरी
डबवाली में करीब 4000 एकड़ में किन्नू के बाग हैं। बागवानी विभाग के डॉ. रघुवीर झोरड़ के अनुसार प्रति एकड़ करीब 100 क्विंटल किन्नू प्राप्त हो रहा है। ग्रेडिंग आदि से किसान को सात से आठ रुपये प्रति किलोग्राम की दर से फायदा होता है। अगर कंप्यूटराइज्ड प्लांट चले तो इंटरनेशनल मार्केट में मुनाफा और बढ़ सकता है। इस प्लांट के बंद होने से किसानों को पंजाब के अबोहर और फाजिल्का आदि शहरों में किन्नू की ग्रेडिंग के लिए जाना पड़ता है, जिससे लागत बढ़ती है।

प्रोसेसिंग यूनिट और इंटरनेशनल मार्केट का सपना
अबूबशहर किन्नू प्लांट के साथ-साथ प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की फाइल केंद्र सरकार को भेजी हुई है। इससे प्लांट में बचने वाले छोटे साइज के किन्नू का जूस बनेगा। वहीं उत्पादन और गुणवत्ता को देखते हुए इंटरनेशनल मार्केट बनाने का भी सपना है। इसके लिए मैं प्रयासरत हूं। फिलहाल सीजन को देखते हुए किन्नू प्लांट को देसी तकनीक से शुरू किया गया है। जो हिस्सा बंद है, उसे भी जल्द शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
-डॉ. केवी सिंह, ओएसडी (मीडिया) हरियाणा

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