सांसद के आश्वासन पर संघर्ष समिति दो फाड़

Rohtak Updated Sun, 24 Feb 2013 05:30 AM IST
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रेवाड़ी। सांसद दीपेंद्र हुड्डा के आश्वासन पर भूमि अधिग्रहण विरोधी संघर्ष समिति लक्ष्य हासिल करने से पहले ही बिखरने लगी है। हुड्डा ने समिति को किसानों पर दर्ज हुए मुकदमे वापस लेने और अधिग्रहण प्रक्रिया रोकने का आश्वासन दिया था। शुक्रवार रात को संघर्ष समिति की मोती की ढाणी में हुई बैठक में सदस्य दो फाड़ हो गए। एक पक्ष सांसद से लिखित में आश्वासन की मांग कर रहा है तो दूसरे मौखिक आश्वासन से संतुष्ट थे। संघर्ष समिति के दो फाड़ होने से इसके पुनर्गठन की संभावना बन गई है। हालांकि सरकार ने समाचार लिखे जाने तक अधिग्रहण पर अंतिम फैसला नहीं लिया था जबकि यह शुक्रवार सुबह तक ले लिया जाना था।
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सीएम के धुर विरोधी सांसद राव इंद्रजीत सिंह के ऐलान के बाद मुख्यमंत्री ने किसानों को बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया था। उनकी जगह सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने किसानों से बात की थी। उन्होंने किसानों की मांगों को सही ठहराते हुए शुक्रवार सुबह तक अधिग्रहण पर अंतिम निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। सरकार की ओर से निर्धारित समय सीमा में कोई फैसला न लिए जाने पर शुक्रवार रात को संघर्ष समिति की बैठक बुलाई गई।
किसान यूनियन के अध्यक्ष राम किशन महलावत ने कहा कि समिति को लिखित आश्वासन नहीं मिला है लेकिन सीएम रैली में घोषणा कर मांगों का समर्थन करेंगे। इसके विपरीत अजय यादव एडवोकेट, कामरेड राजेंद्र सिंह एडवोकेट, गुरदयाल नंबरदार आदि समिति सदस्यों का कहना है कि वे जब तक लिखित में आश्वासन नहीं मिलता, विश्वास नहीं कर सकते। सरकार ने पहले भी समिति को मौखिक आश्वासन देकर धोखा किया है। अधिग्रहण की प्रक्रिया रद्द करने का आश्वासन देने के बाद सरकार ने सेक्सन छह का नोटिस दे दिया था।
यह है मामला
बावल तहसील के 16 और रेवाड़ी के 5 गांवों की भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसान पिछले साल 16 जुलाई को जिला सचिवालय पर धरना दे रहे थे। अधिकारियों द्वारा सुध न लेने पर किसान लघु सचिवालय में घुस गए थे। वहां कई किसान घायल हो गए थे। इसके विरोध में संघर्ष समिति ने 22 जुलाई को आसलवास गांव में महापंचायत कर एनएच-8 पर प्रदर्शन किया था। वहां पुलिस और किसानों में खूनी संघर्ष हुआ था। किसानों और पुलिस के बीच हुए खूनी संघर्ष की जांच को लेकर मुख्यमंत्री ने 25 जुलाई को जस्टिस इकबाल आयोग का गठन किया था।
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