कहीं पिकनिक तो कहीं पर पूजा-अर्चना

Rohtak Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
रोहतक। शुक्रवार को पारंपरिक करवाचौथ का व्रत रखकर सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र की कामना की व उनकी सलामती की भगवान से दुआ मांगी। महिलाओं ने अपने-अपने तरीके से करवाचौथ के व्रत को सेलिब्रेट किया और खूब पिकनिक की। किसी ने तिलियार पर वोटिंग का आनंद लिया, तो कोई पति संग सिनेमा देखने के लिए निकली। दिनभर बाजार में भी खरीददारी का दौर चलता रहा।
नवविवाहिताओं के लिए विशेष तौर पर यह पर्व उत्साहजनक रहा। उन्होंने अपने पति से मनमाना उपहार पाया और दिनभर घूमना-फिरना किया। हालांकि रीति-रिवाज के अनुसार कुछ महिलाओं ने दिनभर भगवान की अराधना की और अपने पति की सलामती व लंबी उम्र की दुआ की। ज्यादातर महिलाओं ने मंदिरों में सत्संग-कीर्तन में हिस्सा लिया और परंपरागत कथा सुनकर दोपहर को जलपान किया। सुबह से ही घरों में महिलाओं की गतिविधियां शुरु हो गई थी। पूजा-अर्चना के बीच दिन की शुरुआत हुई तो दोपहर तक महिलाओं ने सत्संग और भजन में बीताया।
इसके बाद शुरु हुई घूमने-फिरने और मनचाहा उपहार पाने की शुरुआत। शाम तक बाजारों में खरीदारी का दौरा जारी रहा। देर रात महिलाओं ने चंद्र देव का दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देकर अपना व्रत समाप्त किया। इसके अलावा वैवाहित जीवन में बंधने के लिए सगाई बंधन में बंध चुके जोडों ने भी इस पर्व को सेलिब्रेट किया। नई नेवली दुल्हन तो सुबह से ही सज कर तैयार हो गई थी। दिनभर उन्हें चूल्हा चौका तक नहीं करने दिया गया, बल्कि एकांत में बैठकर या तो सास से प्रचलित कथाएं सुनीं या फिर भगवान की आराधना की गई। शाम को पति के साथ ऐसे जोड़ों ने खूब पिकनिक का आंनद लिया। वहीं संकट मोचन मंदिर की संचालिका गायत्री ने करवाचौथ का महत्व बताया।

मंदिर में करवा की कथा का आयोजन

माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में शुक्रवार को करवा चौथ पर करवा की कथा का आयोजन किया गया। मंदिर की संचालिका गायत्री ने करवा चौथ का महत्व बताते हुए कहा कि यह पर्व कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा गया है। इस दिन खीर चंद्र की शीतल किरणों से मंडित करके भक्तजनों को प्रसाद के रूप में वितरित की जाती है, ताकि भक्तजन स्वस्थ और यौवन शक्ति से परिपूर्ण हो। तीन दिन बाद करवा चौथ पर्व मनाया जाता है। साध्वी गायत्री ने कहा कि यह व्रत शास्त्रों के अनुसार विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए, माताएं बच्चों की दीर्घायु के लिए तथा युवतियां सुंदर व योग्य वर पाने के लिए करती हैं। रिद्धी सिद्धी प्रदाता गणेश का वंदन करते हुए गौरी की पूजा की गई। गौरी पूजा की विधियां तो अनेक हैं परंतु भाव गौरी पूजन ही है। शाम को व्रत की कथा करके महिलाएं सांस को, जेठानी को, कन्या को अथवा ब्रह्मणी को खाने योग्य फल, मिठाईयां, मेवे, बर्तन, वस्त्र तथा दक्षिणा देकर व पांव छूकर अपने पति की दीघायु का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। चंद्र उदय होने पर चंद्रमा को अर्क देकर महिलाएं अपना उपवास संपन्न करती हैं और भोजन ग्रहण करती हैं।

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