‘पापा’ के किस्सों ने रुलाया भी, हंसाया भी

Rohtak Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
रोहतक। श्रीराम रंगशाला में आयोजित छह दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य उत्सव के दौरान शुक्रवार को पापा नाटक का मंचन किया। नाटक में कलाकारों ने अपनी सच्ची कहानियों को मंच पर उकेरा। नाटक का शुभारंभ पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा ने किया।
पवन गौतम द्वारा निर्देशित इस नाटक में कलाकारों का कहना था कि जब भी हमें अपने पिता के किस्से याद आते हैं तो यकीनन सब के पापाओं की जिंदगी में एक ना एक किस्सा तो ऐसा होता है कि सब की हंसी छुट जाए। नाटक शुरू होते ही सभी कलाकार मंच पर आते हैं और वो सारे चुटकुले, सारी कहावतें सुना डालते हैं जो पापाओं पर बनी हुई हैं। मसलन एक कहता है कि मेरे पापा इतने लंबे थे कि उनके हाथ बादलों से टकरा जाते थे तो दूसरा कहता है कि पापा तो मेरे भी बहुत लंबे थे लेकिन वे इस तरह की फालतू हरकतें नहीं करते थे कि हाथ बादलों से टकराते।
मंच पर अभिनय कर रहे कलाकारों ने फिर एक-एक कर के अपने पिता के किस्से सुनाए तो दर्शकों से बिना हंसे नहीं रहा जा सका। हर एक का किस्सा पहले वाले से भिन्न था और एक ने तो हद ही कर दी। एक कलाकार कहते है कि मेरे पापा घर बहुत कम आया करते थे। सारा दिन हॉस्टल में ही पड़े रहते थे। शादी होने के बाद भी पापा ने घर की राह नहीं ली लो दादा जी ने उनका खर्चा-पानी भेजना बंद कर दिया। पापा ने जैसे-तैसे तीन महीने तो निकाल दिए लेकिन जब कुछ ज्यादा ही कड़की आई तो उन्होंने अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ एक योजना बनाई और चारों ने मिलकर एक लाश कहीं से चुरा ली। लाश को मयैत पर सजा कर बाजार ले गए और लोगों से इस लावारिश लाश को दफनाने के लिए चंदा इक्ट्ठा करने लगे। बात सन साठ की है उन दिनों में पापा और उनके दोस्तों ने चार सौ से ज्यादा रुपए इक्ट्ठे कर लिए थे। बाद में कंधा बदलते बदलते लाश किस के कंधे पर जा पहुंची और कहां गई किसी को पता ही नहीं चला। इसी तरह सभी के किस्से गुदगुदाने वाले थे। लेकिन नाटक के अंत में आते आते पूरा माहौल ही बदल गया और फिर सबने अपने पापा के बिछुड़ने की कहानी बताई कि अंत समय में कैसे उनके पापा से उनका साथ छुट गया।
एक लड़की बताती है कि शादी के बाद पापा अक्सर हर रोज सुबह दस बजे मुझे फोन करते है फिर बाद में उन्होंने फोन करने की बजाए एसएमएस. करना शुरू कर दिया। बेटी को अपने बाप के एसएमएस हर रोज पढ़ने की आदत सी हो गई है और यह कहते कहते बेटी की आंखों में पानी आ जाता है कि अगर किसी दिन सुबह हर रोज की तरह पापा का एसएमएस नहीं आया तो...। ऐसे कई मौके पर कलाकारों के साथ-साथ दर्शकों की आंखें भी नम हो गई। कुरुक्षेत्र के दर्शक ऐसा उम्दा नाटक देखकर दंग रह गए। जहां नाटक की पटकथा जानदार थी वहीं सभी कलाकारों का बेजोड़ अभिनय भी दमदार था। नाटक में मुख्य भूमिकाएं सुमित, शिवानी, अबीर, इमरान, राघव, सुनील, विरेंद्र व उमेश ने निभाई। जबकि प्रकाश व्यवस्था नितिन भारद्वाज ने की तथा संगीत पवन गौतम ने दिया। इस अवसर पर काफी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।

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