अनेक पुस्तकों का हुआ विमोचन

Rohtak Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
रेवाड़ी। हरियाणा साहित्य अकादमी के अकादमी के पूर्व निदेशक एवं वरिष्ठ रचनाकार डा. चंद्र त्रिखा ने कहा कि गुप्त जी की कलम ने पत्रकारिता एवं साहित्य के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। हिंदी पत्रकारिता के मसीहा बाबू बालमुकुंद गुप्त राष्ट्रीयता के पक्षधर, पोषक एवं सजग प्रहरी के रूप में सदा अमर रहेंगे। वह बड़ा तालाब स्थित ब्रह्मगढ़ परिसर में अकादमी व बाबू बालमुकुंद गुप्त पत्रकारिता एवं साहित्य संरक्षण परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा स्वतंत्रता सम्मान समिति के अध्यक्ष हरिराम आर्य ने की तथा दैनिक ट्रिब्यून के पूर्व संपादक विजय सहगल ने मुख्यवक्ता के तौर शिरकत की। समारोह में विचार गोष्ठी, पुस्तक लोकार्पण, पुस्तक पुरस्कार तथा बाबू बालमुकुंद पुरस्कार समारोह के मुख्य आकर्षण रहे। कार्यक्रम में रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर, गुड़गांव, दिल्ली तथा राजस्थान के सैकड़ों रचनाकारों ने भाग लिया।
डा. त्रिखा ने कहा कि गुप्त जी ने अपनी कलम के माध्यम से न केवल पत्रकारिता एवं साहित्य को नए आयाम दिए अपितु आजादी की अलख भी जगाई। अध्यक्षीय संबोधन में आर्य ने गुप्तजी को नवजागरण का पुरोधा बताते हुए उनके लेखकीय योगदान को राष्ट्रीय एकता का प्रेरक अभियान बताया। विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता एवं दैनिक ट्रिब्यून के पूर्व संपादक विजय सहगल ने कहा कि गुप्त जी की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। हर कलमकार को उनके आदर्शों के अनुरूप लेखकीय जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा।
इस अवसर पर प्रख्यात बाल साहित्यकार घमंडी लाल अग्रवाल को साहित्य तथा उपन्यासकार डा. उमाशंकर यादव पार्थ को साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में बाबू बालमुकुंद गुप्त पुरस्कार से नवाजा गया। समारोह में बाबूजी का भारतमित्र परिवार की ओर से चार पुस्तकों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कृत किया गया, जिनमें हिसार के वरिष्ठ साहित्यकार राधेश्याम शुक्ल का गीत संग्रह ‘त्रिकाल के गीत’ व रेवाड़ी निवासी संस्कृति लेखक सत्यवीर नाहड़िया की कृति ‘लोकराग’ को स्व. दमयंती यादव स्मृति पुरस्कार, गुड़गांव की रचनाकार सुरेखा शर्मा की पुस्तक ‘रिश्तों का अहसास’ को स्व. जुगरी देवी स्मृति कथा पुरस्कार तथा लखनऊ के गज़लकार कुंवर कुसुमेश के गज़ल संग्रह ‘कुछ न हासिल हुआ’ को वैद्य वीरबल प्रसाद स्मृति साहित्य सम्मान से अलंकृत किया गया।
नवप्रकाशित कृतियों के लोकार्पण का शतक बना चुकी परिषद् के इस आयोजन में इस बार भी पांच कृतियों का विमोचन किया गया, जिनमें वरिष्ठ साहित्यकार रोहित यादव की पुस्तक ‘उम्र गुजारी आस में’ दोहा सतसई, गुड़गांव की लेखिका कृष्णलता यादव के दोहासंग्रह ‘मन में खिला वसंत’, खोरी निवासी वरिष्ठ रचनाकार दर्शना शर्मा जिज्ञासु का हरियाणवी गीता पद अनुवाद ’न्यूं का न्यूं’ तथा सिम्भावली निवासी वरिष्ठ कवि राम आसरे गोयल ‘शशि’ के काव्य संग्रह ‘स्वगंधे’ उल्लेखनीय हैं।
समारोह में एक ओर जहां मधुरकंठी ग़ज़लकार विपिन सुनेजा ने गुप्तजी की रचनाओं का सस्वर पाठ कर भावविभोर कर दिया वहीं श्रीपति शेखावत, संजीता यादव, ईश्वर सिंह यादव, अजय शर्मा, लोकेशदत्त, दिव्या शर्मा, स्नेह व पूजा द्वारा गुप्त का भावपूर्ण स्मरण स्वरांजलि के माध्यम से किया गया। परिषद् के संरक्षक नरेश चौहान एडवोकेट के शाब्दिक अभिनंदन से प्रारंभ हुए इस साहित्यिक आयोजन में केएलपी कॉलेज के पत्रकारिता विभाग के भाषण व निबंध प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया जिनमें सोनिया पाराशर, चरण सिंह, विनीत यादव, सरला व करिश्मा शामिल हैं। सत्यवीर नाहड़िया के संचालन में चले कार्यकरम में संस्था की ओर से महासचिव डा. प्रवीन खुराना, रघुविंद्र यादव, ईश्वर सिंह, प्रेमप्रकाश, हरिप्रकाश, ऋषि सिंहल, शीला काकस, डा. लाज कौशल तथा डा. कविता यादव ने मेहमानों को स्मृति चिह्न भेंट किए। समारोह में साहित्य, शिक्षा तथा सामाजिक संगठनों से जुड़े अनेक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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