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पीजीआई से छुट्टी मिलते ही आमरण अनशन पर बैठे संत, देर रात फिर उठाकर कराया भर्ती

Updated Tue, 06 Jun 2017 02:15 AM IST
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पीजीआई से छुट्टी मिलते ही आमरण अनशन पर बैठे संत, देर रात फिर उठाकर कराया भर्ती
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
गोरक्षा को लेकर आमरण अनशन कर रहे संत गोपालदास पीजीआई से छुट्टी मिलते ही दोबारा से पार्क में जाकर बैठ गए। देर रात एसडीएम अरविंद मल्हान पुलिस बल के साथ पार्क पहुंचे और संत गोपालदास को फिर से पीजीआई में भर्ती करवा दिया। वहीं, रविवार को पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने उनके सामान को सेक्टर-6 में शिफ्ट कर दिया था, लेकिन संत बिना किसी सामान के मानसरोवर पार्क में पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं संत ने देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गो सुरक्षा और गोशालाओं की हालत से अवगत कराते हुए सुधार की मांग की है।

संत गोपालदास ने चार दिन पहले मानसरोवर पार्क में आमरण अनशन शुरू किया था। संत का कहना है कि गोरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। गो चराने की भूमि पर भी लोगों ने कब्जे कर रखे हैं। इन्हीं सब मांगों को लेकर संत ने आमरण अनशन शुरू किया है। रविवार देर शाम अचानक उनकी हालत बिगड़ गई। कई दिनों से भूखे-प्यासे रहने की वजह से उन्हें खून की उल्टी लगी। संत की हालत बिगड़ने का पता चलते ही देर रात एसडीएम अरविंद मल्हान और अन्य पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी मौके पहुंचे। अधिकारियों ने संत को जबरन उठाकर पीजीआई में भर्ती करा दिया। उनके सामान को भी सेक्टर-6 में शिफ्ट करा दिया। सोमवार दोपहर बाद हालत में सुधार होते ही चिकित्सकों ने संत को छुट्टी दे दी।


छुट्टी मिलने पर संत फिर से मानसरोवर पार्क में जाकर बैठ गए। बिना किसी समान के संत ने पेड़ के नीचे ही त्रिपाल बिछाकर आमरण अनशन शुरू कर दिया। देर शाम तक पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी उन्हें मनाने में लगे हुए थे। पार्क से आमरण अनशन खत्म कराने को लेकर अधिकारी पूरे प्रयास में लगे रहे। अधिकारियों का तर्क है कि यदि उन्हें आमरण अनशन करना है तो सेक्टर-6 में जाकर करें। पार्क में आमरण अनशन नहीं होने देंगे। देर रात एसडीएम अरविंद मल्हाल पुलिस बल के साथ मानसरोवर पार्क पहुंचे और गोपालदास को उठाकर फिर से पीजीआई में भर्ती करवा दिया गया। उधर, बोहर, खरावड़ और बहु अकबरपुर आदि कई गांवों के ग्रामीणों ने पहुंचकर संत का हाल जाना और उन्हें समर्थन दिया।

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