सावधान! जहरीली हो रही है

Rohtak Bureau Updated Mon, 05 Jun 2017 02:27 AM IST
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सावधान! जहरीली हो रही है शहर की आबोहवा
विनीत तोमर
रोहतक।
सावधान! अपने शहर की आबोहवा फिर से जहरीली हो गई है। हालांकि 2016 में काफी हद तक सुधार था, लेकिन प्रदूषण फिर से बढ़ रहा है, जो शहरवासियों की सेहत के लिए ठीक नहीं है। प्रदूषण को लेकर समय रहते जागरूक नहीं हुए तो आने वाले समय में सांस लेना भी दूभर हो जाएगा। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि एमडीयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग से लिए गए आंकड़ों में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
यूं तो प्रदूषण हर जगह बढ़ रहा है, लेकिन रोहतक में पिछले वर्ष प्रदूषण को लेकर कुछ संतोषजनक आंकड़े आए थे। इन्हें देखकर लग रहा था कि शायद अब जिले के लोग जागरूक हुए हैं। लेकिन 2017 में अभी तक का जो आंकड़ा सामने आया है उसने एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल, ट्रांसपोर्ट और कंस्ट्रक्शन को बढ़ते प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। इनकी वजह से आरएसपीएम (रेस्पाइरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर) 2014 के मुकाबले 2016 में करीब 10 फीसदी तक कम रहा था। फिलहाल के जो आंकड़े सामने आए हैं उसमें यह प्रदूषण 2016 के मुकाबले 20 फीसदी तक बढ़ गया है। आरएसपीएम नाम का यह प्रदूषण पिछले चार साल में कभी भी इतना नहीं बढ़ा है। पर्यावरणविदों की मानें तो समय रहते अब जागरूक होना बेहद जरूरी है, अन्यथा स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

कुछ ऐसा है प्रदूषण का आंकड़ा
प्रदूषण 2014 2015 2016
पीएम-10 120.9374 92.53695 91.8975
पीएम-2.5 64.43708 53.41607 54.74629
कार्बन मोनो ऑक्साइड 1.188316 0.790719 0.802613
नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड 44.82978 31.36048 25.5153
नाइट्रोजन ऑक्साइड 31.89680 24.76116 18.41115
ओजोन 37.22639 23.333 20.94546
सल्फर डाई ऑक्साइड 4.19869 3.222897 3.83507
नोट : यह माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब है। 2016 के मुकाबले पीएम-2.5 की मात्रा 54.74629 से बढ़कर 2017 में 74 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब तक पहुंच गई है। हालांकि बाकी पार्ट्स की मात्रा में भी इजाफा हुआ है।

यह होता है नुकसान
- कार्बन मोनो ऑक्साइड : यह हीटर, जनरेटर और स्टोव आदि के कारण होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति हार्ट डिजीज का शिकार होता है।
- ओजोन : पेस्टीसाइड के प्रभाव से फैलता है। इस कारण व्यक्ति को एलर्जी से कई समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
- पीएम 10 और 2.5 : पर्यावरण को बिगाड़ने में इस पार्ट की सबसे अधिक भूमिका रहती है। यह ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और कंस्ट्रक्शन आदि की वजह से होता है। इसकी चपेट में आने से आंखों में जलन और अस्थमा की बीमारी होती है।
- नाइट्रोजन ऑक्साइड : यह प्रदूषण ईंट भट्ठे और ट्रांसपोर्ट आदि से फैलता हे। इसकी वजह से भी अस्थमा और आंखों के जलन के साथ कई अन्य बीमारियां होती है।

2016 में प्रदूषण के जो आंकड़े सामने आए थे उससे देखकर लग रहा था कि अब प्रदूषण पर कुछ हद तक रोक लग सकती है। लेकिन फिलहाल के आंकड़े देखें तो उनके अनुसार प्रदूषण फिर से बढ़ गया है। आरएसपीएम नाम का प्रदूषण सबसे खतरनाक होता है। जो 2013 के बाद से कभी भी 74 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब तक नहीं पहुंचा। लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने होंगे और ट्रांसपोर्ट को लेकर भी सरकार को भी कड़े नियम बनाने चाहिए।
- प्रो. राजेश धनखड़, विभागाध्यक्ष पर्यावरण विज्ञान विभाग एमडीयू।

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