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बिना हेडमास्टर चल रहे जिले के 26 सरकारी स्कूल

Updated Sun, 04 Jun 2017 01:04 AM IST
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बिना हेडमास्टर चल रहे जिले के 26 सरकारी स्कूल
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चरखी दादरी।
राजकीय स्कूलों के अपग्रेडेशन का मुद्दा प्रदेशभर में जोरशोर से उठाया जा रहा है। वहीं, दादरी जिले में हैड मास्टर व लेक्चरर के कई पद खाली पड़े हैं। नया शैक्षिक सत्र हुए दो माह का समय बीत चुका है लेकिन जिले के 26 सरकारी स्कूल बिना हेडमास्टर के चल रहे हैं और सीनियर सेेकेंडरी स्कूलों में 35 लेक्चरर और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में प्राचार्य के भी 41 पद के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इससे कक्षा नौवीं से 12वीं तक की पढ़ाई काफी हद तक प्रभावित हो रही है। इससे इन स्कूलों का प्रबंधन ठीक प्रकार से नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा एसएमसी की मासिक बैठकें भी इनकी कमी से बाधित हो रही हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में इस समय 26 स्कूलों में हैडमास्टर के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। हैड मास्टर न होने पर कार्यालय इंचार्ज बनाकर जैसे-तैसे स्कूलों में काम चलाया जा रहा है। राजकीय हाई स्कूल ढाणी फौगाट, राजकीय हाई स्कूल भागवी, राजकीय हाई स्कूल कमोद, राजकीय हाई स्कूल बौंद कलां, राजकीय हाई स्कूल कासनी, राजकीय स्कूल खोरड़ा, डालावास, बडराई, बाढड़ा, माई खुर्द, कारिधारिणी, भांडवा, जेवली, डांडमा, निहालगढ़, नीमड़ बडेसरा, जीतपुरा,ऊण, लाडावास, राजकीय हाई स्कूल बलकरा, बालरोड़, घिकाड़ा, मैहड़ा, रासीवास, डोहकी आदि स्कूलों में हैड मास्टर की तैनाती नहीं है। इतना ही नहीं बीईओ कार्यालय में भी दो सहायक के पद खाली हैं। इसके अलावा वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में 35 लेक्चरर की भी कमी से कक्षा नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। समय पर पाठ्यक्रम पूरा न होने को लेकर चिंता बनी रहती है। इसका बोर्ड परीक्षा परिणाम पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। कक्षा छठी सेे आठवीं तक पढ़ाने वाले मास्टर्स के भी 40 पद रिक्त पड़े हैं। स्कूल का बढ़िया अनुशासन स्कूल मुखिया की दक्षता एवं योग्यता पर ही अधिक निर्भर करता है। स्कूलों में गठित एसएमसी कमेटियों के संचालन व उनकी हर माह होने वाली मीटिंग को लेकर स्कूल मुखिया को ही पूरा प्रारूप तैयार करना होता है। अध्यापकों व बच्चों की रूटीन की समस्याओं व शिक्षण संबंधी दिक्कतों का निवारण करना व विभाग के नए निर्देशों व पॉलिसी की अनुपालन करना भी शामिल है। ऐसे में हैड मास्टर व प्राचार्यों के बिना स्कूल की प्रगति संभव नहीं है।

जिले में करीब 365 राजकीय स्कूल
जिले में करीब 365 राजकीय स्कूल हैं जिनमें प्राइमरी, मिडिल व हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। बौंद कलां ब्लॉक में 115 स्कूल हैं जिनमें 63 प्राइमरी स्कूल ,14 मिडल स्कूल व 38 हाई व सीनियर सेकंडरी स्कूल शामिल हैं। इस प्रकार दादरी ब्लॉक में करीब 120 प्राइमरी,हाई, सीनियर व मिडल स्कूल हैं। करीब 120 स्कूल बाढड़ा ब्लॉक में हैं। बौंदकलां ब्लॉक में जेबीटी के 221 पद स्वीकृत हैं। इसी प्रकार मास्टर वर्ग के 360 व प्राध्यापक के करीब 210 पद स्वीकृत हैं।
---अभिभावकों से बातचीत---
1..अभिभावक प्रवेश कुमार का मानना है कि स्कूल में हैड मास्टर व प्राचार्य का होना जरूरी है तभी स्कूल का प्रबंधन ठीक प्रकार से हो सकेगा व पढ़ाई का माहौल बन सकेगा। हैड के बिना स्कूल आगे नहीं बढ़ सकता। पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है।
2..अभिभावक कर्ण सिंह का कहना है कि बिना मुखिया के तो घर का भी ठीक प्रकार से संचालन नहीं हो पाता। स्कूल संचालन के लिए कुशल हैड या मुखिया का होना जरूरी है। बिना हैड के अनुशासन व पढ़ाई दोनो पर ही प्रतिकूल असर पड़ता है।
3...कृष्ण कुमार का मानना है कि स्कूलों में हैड मास्टर की भूमिका सर्वोपरि है। हैडमास्टर के बिना अन्य शिक्षकों पर मनोवैज्ञानिक दवाब नहीं बन पाता। स्कूल का अनुशासन भी कमजोर बना रहता है। शिक्षकों व बच्चों पर भी दवाब नहीं बन पाता।
4..अभिभावक जगबीर सिंह का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई के अलावा अन्य देखरेख व व्यवस्था के काम भी होतेे हैं अगर समय पर सही निर्णय नहीं लिए जाएंगे तो स्कूल की प्रगति थम जाती है इससे स्कूल का पूरा सिस्टम चरमरा जाता है। एसएमसी की मीटिंग आयोजित करने में भी हैड का ही रोल होता है।
5...अभिभावक सत्यवान का मानना है कि हैडमास्टर व प्राचार्य के बिना स्कूल के शैक्षिक परिणाम पर भी असर पड़ता है। सही तरीेके से समयसारिणी बनाना व समय पर पाठयक्रम पूरा करवाने के लिए समय-समय पर दिशा-निर्देश देना मुखिया का ही काम होता है। स्कूलों में हैड के रिक्त पद जल्द भरने चाहिए।
6...भूप सिंह का मानना है कि किसी भी संस्था में मुखिया की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। इसी प्रकार स्कूल मुखिया का स्कूल टाइम में मौजूद रहना अति आवश्यक है। वह पढ़ाई का वातावरण बनाने में विशेष भूमिका निभाते है।
7...अभिभावक प्यारे का कहना है कि स्कूलों में हैड मास्टर व प्राचार्य के बिना स्कूल का हर कामकाम बाधित होता है। स्कूल का वित्तीय प्रबंधन भी चरमरा जाता है। स्कूल फंड का सदुपयोग हैड के मार्गदर्शन से ही संभव है। ऐसे में स्कूलों में हैड मास्टरों व प्राचार्यो के पद इतनी संख्या में खाली होना चिंता का विषय है।
वर्सन----
सरकार की ओर से शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। प्रिंसिपल की प्रमोशन की सूची भी जारी हो चुकी है अब जल्द ही इन स्कूलों में शिक्षकों ,हैडमास्टर व प्राचार्य आदि की तैनाती हो जाएगी।
बीईईओ , कुलदीप फौगाट

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