-पर्यावरण दिवस पर विशेष- कलेसर नेशनल पार्क से गायब हो रहे जानवर व लकड़ी

Rohtak Bureau Updated Sun, 04 Jun 2017 12:52 AM IST
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पर्यावरण दिवस पर विशेष
यमुनानगर। इंसान का स्वार्थ जंगल और उसमें रहने वाले जंगली जानवरों पर भारी पड़ रहा है। हर साल इंसान द्वारा लगाई जाने वाली आग में बेशकीमती वन संपदा व जंगली जीव-जंतु आग की भेंट चढ़ जाते हैं। वहीं, शिकारियों की गिद्ध दृष्टि जंगली जानवरों की संख्या को साल दर साल कम कर रही है।
वन विभाग के मुताबिक हरियाणा में वन क्षेत्र करीब चार प्रतिशत हैं। प्रदेश के कुल वन क्षेत्र का 33 प्रतिशत अकेले यमुनानगर में है। यहां करीब 13 हजार एकड़ में वाइल्ड लाइफ सैंचुरी व 11 हजार एकड़ में कलेसर नेशनल पार्क है। अकेले कलेसर नेशनल पार्क व वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में प्रतिवर्ष आग लगने की दर्जनों घटनाएं होती हैं। स्टाफ व संसाधन की कमी के कारण वन विभाग के लिए आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है। कलेसर नेशनल पार्क व वाइल्ड लाइफ सैंचुरी में खैर के पेड़ भी काफी संख्या में हैं। खैर की लकड़ी की कीमत करीब चार हजार रुपये प्रति क्विंटल है। इस कारण जंगल से खैर के पेड़ चोरी-छिपे काटे जा रहे हैं। पिछले पांच सालों में वन विभाग खैर तस्करों से हजारों क्विंटल खैर की लकड़ी बरामद कर चुका है। इसके बावजूद खैर की तस्करी थम नहीं रही है।


वन रक्षकों के हाथों मारा जा चुका है एक शिकारी
कलेसर नेशनल पार्क व वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में तेंदुए, सांभर, चीतल, बार्किंग डियर, जंगली सुअर, जंगली लाल मुर्गा बहुतायत में हैं। शिकारियों की गिद्द दृष्टि जंगली जानवरों पर लगी रहती है। शिकारी यहां के जानवरों का लंबे समय से शिकार कर रहे हैं। वन विभाग पूरी मुस्तैदी से जानवरों की सुरक्षा में लगा हुआ है, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते जंगली जानवरों के शिकार को रोकना मुश्किल हो रहा है। 17 अप्रैल 2011 को पानीवाली खोल के नजदीक शिकारियों व वन रक्षकों के बीच गोलाबारी में एक शिकारी मारा गया था, जबकि दो फोरेस्ट गार्ड घायल हो गए थे। यह शिकारी अपने साथियों के साथ हिमाचल प्रदेश की सिंबलबारा सैंचरी से कलेसर नेशनल पार्क में जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए आया था।

पार्क में मिली है दुलर्भ रस्टी स्पोटेड कैट
कलेसर नेशनल पार्क व वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में रहने वाले जंगली जानवरों की संख्या का पता लगाने के लिए जंगल में कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों में दुलर्भ प्रजाति की रस्टी स्पोटेड कैट कैद हुई है, जो कि कलेसर में पहली बार देखने को मिली है। यह बिल्ली आम तौर पर मध्य व दक्षिण भारत मेें पाई जाती है। इस बिल्ली के कलेसर में मिलने के बाद यहां इसकी काफी संख्या होने की उम्मीद जताई जा रही है।


जंगल और जंगली जानवरों को बचाने के लिए बनाया 12 सालों का वर्किंग प्लान
यमुनानगर। जिला वन अधिकारी रहे राजेश गुलिया कलेसर नेशनल पार्क व वाइल्ड लाइफ सैंचुरी से काफी समय से जुड़े हुए है। कई महीनों की मेहनत के बाद वन क्षेत्र को बढ़ाने के लिए वर्किंग प्लान तैयार किया है। साथ ही वन क्षेत्र को होने वाले नुकसान को भी उजागर किया है। यह वर्किंग प्लान वर्ष 2028 तक के लिए बनाया गया है। वर्किंग प्लान के तहत जंगल में रेल वाटर हार्वेस्टिंग के लिए पौंड, डैम व टैंक बनाने के साथ-साथ प्राकृतिक नालों में वाटर होल बनाए जाएंगे। कलेसर नेशनल पार्क में साल के पेड़ हजारों की संख्या में हैं, लेकिन वन विभाग के पास इन पेड़ों का कोई रिकार्ड नहीं है। वर्किंग प्लान के तहत साल के पेड़ों पर स्टडी कर इनकी गिनती की जाएगी। साथ ही वन क्षेत्र में सघनता बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा वन क्षेत्र के आसपास रहने वालों को जागरूक कर उनकी मदद से वन क्षेत्र को बढ़ाया जाएगा। वर्किंग प्लान के तहत वन कर्मियों को जंगल में लगने वाली आग को रोकने के उपायों के बारे में बताया जाएगा और जंगली जानवरों की सुरक्षा का बंदोबस्त भी किया जाएगा। राजेश गुलिया ने बताया कि पिछले 10 सालों के दौरान कलेसर नेशनल पार्क व वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में करीब छह प्रतिशत पेड़ कम हुए हैं। वर्किंग प्लान में वन क्षेत्र में पेड़ों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।


आग से नष्ट हो जाते हैं जमीन के आवश्यक तत्व
राजेश गुलिया ने बताया कि जंगल में लगी आग प्राकृतिक तौर पर पौधे उगने की क्षमता को लगभग खत्म कर देती है। इससे जंगलों में भूमि कटाव भी बढ़ जाता है। जंगल में लगने वाली 95 प्रतिशत आग मनुष्य द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए लगाई जाती है ताकि पशुओं के लिए अच्छी घास व खेती के लिए नई जमीन उपलब्ध हो सके। अधिक आग लगने पर जमीन गर्म होने लगती है, जिससे नाईट्रेट अमोनिया सल्फर, फास्फोरस और जमीन के अन्य आवश्यक तत्व नष्ट हो जाते हैं। यूं तो हरियाणा के वन क्षेत्र में आग लगती रहती है, लेकिन 5 जून 2008 को पंचकूला के मोरनी वन मंडल में काफी भयंकर आग लगी थी। इस आग को बुझाने के लिए सेना की मदद ली गई, जो कि हरियाणा के इतिहास में आग बुझाने मेें सेना बुलाने का अब तक का इकलौता मामला है। सेना, स्थानीय प्रशासन व वन विभाग ने करीब 20 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जंगल की आग पर काबू पाया था।


पालतु पशु रोक रहे जंगल की सघनता
गुलिया के मुताबिक जंगल को सबसे अधिक नुकसान वन क्षेत्र के आसपास रहने वालों की वजह से हो रहा है। कलेसर नेशनल पार्क व वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के आसपास रहने वाले ग्रामीण पशु पालन से जुड़े हैं। वे अपने जानवरों को चराने से जंगलों में ले जाते हैं। इन जानवरों के पैरों की वजह से जंगल की उपजाऊ जमीन खराब होती है, जिससे पौधे पनप नहीं पाते हैं और जंगल की सघनता कम होती है।

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